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Vindhya First

Bandhavgarh: 10 हाथियों की मौत की नहीं सुलझ रही गुत्थी, साज़िश या कुछ और के बीच फंसा पेंच?

बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 29 अक्टूबर को पार्क के खितोली रेंज के अंतर्गत सांखनी और बकेली में चार जंगली हाथी मरे मिले. 30 अक्टूबर को चार और फिर अगले दिन 31 अक्टूबर को दो हाथी फिर मरे हुए मिले. 72 घंटे में 10 हाथियों की मौत के बाद जांच जारी है.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) में पिछले कुछ दिनों के भीतर 10 हाथियों की मौत (Elephant Death) के कारणों को लेकर असमंजस बना हुआ है. इसी बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने बांधवगढ़ (Bandhavgarh) में 10 हाथियों की मौत के मामले में दो वरिष्ठ वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया. अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के बाद श्री यादव ने यह निर्णय लिया. बता दें कि 29 अक्टूबर को पार्क के खितोली रेंज के अंतर्गत सांखनी और बकेली में चार जंगली हाथी मरे मिले. 30 अक्टूबर को चार और हाथियों की मौत हुई. इसके अगले दिन 31 अक्टूबर को दो हाथियों की फिर मौत हो गई. वन्य जीव विशेषज्ञ (wildlife expert) अजय दुबे के मुताबिक, देश में इससे पहले कभी भी 72 घंटे के अंदर 10 हाथियों की मौत नहीं हुई है.

13 हाथियों का झुंड था
वन विभाग के मुताबिक, 13 हाथियों का झुंड था. इसमें अब सिर्फ तीन हाथी बचे हुए हैं. इन हाथियों के स्वास्थ्य पर अब नज़र रखी जा रही है. वन विभाग की टीम को सबसे पहले 29 अक्टूबर को 4 हाथी मृत मिले थे, वहीं 6 अन्य हाथी गंभीर रूप से बीमार थे. बीमार हाथियों का इलाज चल रहा था, लेकिन अगले ही दिन मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर की वजह से चार और हाथियों की मौत हो गई. इसके अगले ही दिन 31 अक्टूबर को बाकी के दो हाथियों ने भी दम तोड़ दिया. जानकारी के मुताबिक देश में अपनी तरह का यह पहला मामला है. ऐसे में राज्य से लेकर केंद्र स्तर तक इसकी गहन जांच-पड़ताल चल रही है.

क्या कोदो की फसल बनी जहर?
वन विभाग के शुरुआती निष्कर्ष के मुताबिक़, कोदो फसल में फंगस लगने की वजह से ज़हर पैदा होता है और इसे खाने से हाथियों की मौत हुई है. बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने कहा “अभी हम पूरी जांच रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि मौत का क्या कारण है. ऐसा दिख रहा है कि हाथियों ने कोदो खाया था और उसने इनके लिए ये ज़हर का काम कर गया.” बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में स्पेशल टास्क फोर्स, वाइल्ड लाइफ़ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के डॉक्टर और विशेषज्ञ इन हाथियों की मौत के कारणों का पता लगाने में जुटे हुए हैं. बता दें कि जबलपुर के स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ़ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के डॉक्टरों ने हाथियों का पोस्टमार्टम किया था इसके बाद 3 अलग – अलग लैब में जांच के लिए बिसरा भेजा गया है.

फसल नष्ट कर मुआवजा देगी सरकार
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीएन अम्बार्ड ने पत्रकारों को शुरुआती जानकारी देते हुए बताया था कि “पोस्टमार्टम के दौरान मृत हाथियों के पेट में मिले कोदो फसल (मिलेट्स) के दाने मौत का कारण हो सकते हैं. इससे पहले भी मध्य प्रदेश में दूषित मिलेट्स के कारण वन्य जीवों की मौत की छुटपुट घटनाएं हुई हैं.” अधिकारियों का कहना है कि, आईवीआरआई बरेली, डब्ल्यूआईआई देहरादून, स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब सागर सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थान कोदो के ज़हरीले होने की जांच कर रहे हैं. इस बीच, वन विभाग ने इस क्षेत्र में फैली कोदो की फसल को नष्ट कर कर दिया है और प्रभावित किसानों को मुआवज़ा देने की बात कही है.

पानी के स्रोतों की भी हो रही जांच
पूरे मामले की जांच के लिए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स, वाइल्डलाइफ़ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और प्रदेश के वन मंत्री रामनिवास रावत ने पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. घटना वाली जगह के 5 किलोमीटर के दायरे में पानी के स्रोतों की भी जांच की जा रही है. इस बात की संभावना भी जाहिर की जा रही है कि यहां का पानी विषैला रहा हो.

हाथियों का परंपरागत भोजन है कोदो
मध्य प्रदेश के वाइल्डलाइफ़ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि कोदो परंपरागत रूप से हाथियों के भोजन में शामिल रहा है, इसलिए इससे मौत की संभावना कम है. हाथियों के विचरण वाले ज्यादातर आदिवासी इलाकों में कोदो-कुटकी उगाया जाता है. ऐसे में छत्तीसगढ़ से लेकर मध्य प्रदेश और झारखंड तक हाथी कोदो-कुटकी खाते हैं, इसलिए कोदो खाने से 10 हाथियों की मौत का सरकारी दावा कमज़ोर लगता है. ये मामला काफी उलझा हुआ है और इस पर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए.

बांधवगढ़ नेशनल पार्क
मध्य प्रदेश के उमरिया ज़िले में 1536 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बांधवगढ़ नेशनल पार्क फैला है. यह बाघों की उच्च घनत्व वाली आबादी के लिए दुनियाभर में मशहूर है. साल 2018-19 में, तकरीबन 40 जंगली हाथियों का एक दल ओडिशा और छत्तीसगढ़ के रास्ते यहां पर पहुंचा था. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में मध्य प्रदेश में करीब 150 हाथी हैं, जिनमें से करीब 70 हाथी बांधवगढ़ नेशनल पार्क में रहते हैं. खास बात यह है कि यह क्षेत्र इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष के लिए भी जाना जाता है. यहां हाथियों के साथ-साथ बाघ और भालू के कारण भी संघर्ष के कई मामले सामने आए हैं. हाल ही में एक जंगली हाथी ने तीन लोगों को कुचल दिया, जिसमें से दो लोगों की मौत हो गई. एक एक्टिविस्ट के मुताबिक इंसानों और जानवरों की बढ़ती आबादी और इसके मैनेजमेंट में कमी इस तरह के कॉनफ्लिक्ट की वजह बन रहे हैं.

हाथियों की मौत पर हमलावर हुआ विपक्ष
एक साथ 10 हाथियों की मौत को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर तीखे हमले किए हैं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश और राज्य के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की आलोचना करते हुए इसे वन विभाग की लापरवाही का परिणाम बताया है. जयराम रमेश सोशल मीडिया पर लिखा, “मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में 7 हाथियों की मौत और 2 या 3 की हालत गंभीर होने की ख़बर बेहद चौंकाने वाली है. इससे बांधवगढ़ में एक ही झटके में हाथियों की आबादी 10% कम हो गई है. इसकी तुरंत पूरी जांच होनी चाहिए और सुरक्षात्मक उपाय किए जाने चाहिए.” वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “दीपावली की पूर्व संध्या पर भगवान गणेश के प्रतीक दस हाथियों की बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में मौत होना बेहद दुखद घटना है. हम भगवान गणेश की पूजा करते हैं, पर मध्य प्रदेश सरकार हाथियों का संरक्षण नहीं कर सकी. इस घटना के पीछे चाहे जो भी कारण हो, सबसे बड़ी लापरवाही वन विभाग की है, जिसने छत्तीसगढ़ और कर्नाटक से विस्थापित होकर आए हाथियों का उचित इंतज़ाम नहीं किया.”

हाथियों की मौत से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए देखिए ये वीडियो।।