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स्वास्थ्य: सावधान! ज्यादा स्क्रीन टाइम से बढ़ सकता है बच्चों में ऑटिज़्म

नई रिसर्च के अनुसार, छोटे बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम बढ़ा सकता है ऑटिज़्म का खतरा

स्वास्थ्य: सावधान! ज्यादा स्क्रीन टाइम से बढ़ सकता है बच्चों में ऑटिज़्म

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, टीवी और टैबलेट बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं. कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को शांत रखने या व्यस्त रखने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपके बच्चे के मानसिक विकास पर कितना गहरा असर डाल सकती है?

हाल ही में AIIMS New Delhi की एक नई रिसर्च ने इस विषय पर गंभीर चिंता जताई है. इस अध्ययन के अनुसार, 1 से 3 साल के बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम का संबंध Autism Spectrum Disorder के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हो सकता है.

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 AIIMS की रिसर्च क्या कहती है?

Sheffali Gulati, जो Pediatric Neurology विभाग की प्रमुख हैं, उनके अनुसार:

“जिन बच्चों को 1 साल की उम्र में ज्यादा स्क्रीन दिखाई गई, उनमें 3 साल की उम्र तक ऑटिज़्म के लक्षण अधिक देखने को मिले.”

इस शोध में यह भी पाया गया कि:

  • ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों ने बहुत कम उम्र में ही स्क्रीन देखना शुरू कर दिया था
  • उनका स्क्रीन टाइम सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा था
  • यह प्रभाव लड़कों में अधिक देखा गया, लेकिन लड़कियों में भी मौजूद था

यह संकेत देता है कि स्क्रीन टाइम केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक संभावित पर्यावरणीय जोखिम कारक बन सकता है.

 अंतरराष्ट्रीय रिसर्च क्या कहती है?

JAMA Pediatrics में प्रकाशित 2022 की एक बड़ी स्टडी (84,000+ बच्चों पर आधारित) ने भी इसी निष्कर्ष को समर्थन दिया:

  • 1 साल की उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम
     3 साल की उम्र में ऑटिज़्म के लक्षणों का बढ़ा जोखिम

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्क्रीन टाइम सीधे ऑटिज़्म का कारण नहीं है, लेकिन यह जेनेटिक फैक्टर्स के साथ मिलकर एक ट्रिगर की तरह काम कर सकता है.

 स्क्रीन टाइम से जुड़े खतरे

Autism Spectrum Disorder के अलावा भी ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के विकास पर कई तरह से असर डाल सकता है:

  •  नींद में कमी
  •  ध्यान और एकाग्रता में गिरावट
  •  भाषा विकास में देरी
  •  मोटापे का खतरा
  •  व्यवहार संबंधी समस्याएं

 WHO और AAP गाइडलाइंस

दुनिया की प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाएं जैसे World Health Organization (WHO) और American Academy of Pediatrics (AAP) स्पष्ट रूप से स्क्रीन टाइम को लेकर सख्त दिशा-निर्देश देती हैं:

 उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम नियम:

 18 महीने से कम:

  • बिल्कुल स्क्रीन नहीं
  • केवल वीडियो कॉल (माता-पिता के साथ) स्वीकार्य

 18–24 महीने:

  • केवल उच्च गुणवत्ता वाला शैक्षिक कंटेंट
  • माता-पिता की उपस्थिति अनिवार्य

 2–5 साल:

  • अधिकतम 1 घंटा प्रतिदिन
  • कंटेंट समझाते हुए साथ देखें

 अतिरिक्त सावधानियां:

  • सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद
  • खाने और परिवार समय में स्क्रीन पूरी तरह बंद

 समाधान: आउटडोर प्ले की ताकत

जब बात बच्चों के स्वस्थ विकास की आती है, तो स्क्रीन का विकल्प केवल एक है-खेल और वास्तविक अनुभव.

UNICEF और अन्य रिसर्च के अनुसार, रोज 1–2 घंटे आउटडोर प्ले से बच्चों का संपूर्ण विकास बेहतर होता है.

 आउटडोर प्ले के फायदे

 शारीरिक विकास

  • दौड़ना, कूदना, चढ़ना → मजबूत शरीर
  • मोटर स्किल्स का विकास

 मानसिक विकास

  • क्रिएटिविटी और समस्या समाधान क्षमता बढ़ती है
  • बेहतर फोकस और लर्निंग

सामाजिक कौशल

  • शेयरिंग और टीमवर्क सीखना
  • इम्पैथी और कम्युनिकेशन बेहतर

 भावनात्मक संतुलन

  • तनाव कम होता है
  • मूड बेहतर और नींद अच्छी

 प्रकृति से जुड़ाव

  • इम्यूनिटी मजबूत
  • मानसिक स्वास्थ्य बेहतर

 आउटडोर प्ले के दौरान सावधानियां

  • सुरक्षित और साफ जगह चुनें
  • सनस्क्रीन का उपयोग करें
  • बच्चे को पर्याप्त पानी दें
  • हल्की चोटों को सीखने का हिस्सा मानें

 स्क्रीन टाइम के बेहतर विकल्प

अगर आप बच्चे को स्क्रीन से दूर रखना चाहते हैं, तो ये विकल्प अपनाएं:

  •  किताब पढ़ना
  •  गाने और कविता
  •  फैमिली गेम्स
  •  ड्राइंग और क्राफ्ट
  •  गार्डनिंग या बालकनी एक्टिविटी

 निष्कर्ष

बच्चों का शुरुआती विकास जीवनभर की नींव तैयार करता है. ऐसे में स्क्रीन टाइम को लेकर लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है. AIIMS और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च यह संकेत देती हैं कि संतुलित और सीमित स्क्रीन उपयोग बेहद जरूरी है.

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