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स्वास्थ्य: FSSAI का बड़ा खुलासा, बड़े फूड ब्रांड्स के हेल्थ दावों पर उठे सवाल

FSSAI ने कई प्रमुख फूड ब्रांड्स को उनके उत्पादों पर किए गए कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर नोटिस जारी किया है. नियामक संस्था ने संबंधित कंपनियों से इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है.

स्वास्थ्य: FSSAI का बड़ा खुलासा, बड़े फूड ब्रांड्स के हेल्थ दावों पर उठे सवाल

क्या पैकेट पर लिखा हर दावा सच होता है?

जब भी हम किसी सुपरमार्केट या किराना स्टोर से जूस, कुकिंग ऑयल, स्नैक्स या बच्चों के पसंदीदा फूड प्रोडक्ट खरीदते हैं, तो सबसे पहले हमारी नजर पैकेट के सामने लिखे बड़े-बड़े दावों पर जाती है. “No Added Sugar”, “100% Natural”, “Healthy”, “Heart Pro”, “Rich in Milk Solids” जैसे शब्द उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

लेकिन क्या इन दावों के पीछे वास्तव में वैज्ञानिक आधार होता है?

हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के कई नामी फूड ब्रांड्स के ऐसे दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. नियामक संस्था ने इन कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए उनके विज्ञापनों और पैकेजिंग पर किए गए दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं.

यह मामला सिर्फ कंपनियों का नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं की सेहत और भरोसे से जुड़ा हुआ है.

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क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FSSAI ने अपनी जांच के दौरान पाया कि कई फूड कंपनियां अपने उत्पादों पर ऐसे दावे कर रही हैं जो या तो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं या फिर उत्पाद की वास्तविक सामग्री से मेल नहीं खाते.

नियामक संस्था का कहना है कि यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद पर स्वास्थ्य से जुड़ा दावा करती है, तो उसके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण होना आवश्यक है. यदि ऐसा नहीं है, तो यह उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की श्रेणी में आता है.

इसी आधार पर एक दर्जन से अधिक फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी किए गए हैं.

किन बड़े ब्रांड्स पर उठे सवाल?

1. Pluckk Mango Fruit Juice

Pluckk के मैंगो फ्रूट जूस पर “No Added Sugar” का दावा किया गया है.

हालांकि जांच में सामने आया कि इस उत्पाद में लगभग 51 प्रतिशत आम का गूदा और 49 प्रतिशत गन्ने का रस मौजूद है.

गन्ने का रस प्राकृतिक रूप से शर्करा का प्रमुख स्रोत माना जाता है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि उपभोक्ता इस दावे को किस रूप में समझे। FSSAI ने इसी कारण इस दावे पर स्पष्टीकरण मांगा है.

2. Kinder Joy

बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय Kinder Joy पर “Rich in Milk Solids” का दावा किया गया है.

FSSAI ने इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं. इसके अलावा उत्पाद से जुड़े “Pure & Healthy”, “100% Authentic” और “Rapid Recovery” जैसे अन्य दावों पर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से जुड़े उत्पादों में किए गए दावों की जांच और भी अधिक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि माता-पिता इन्हीं दावों के आधार पर खरीदारी करते हैं.

3. Saffola Cooking Oil

Saffola Total Heart Pro Multi Source Cooking Oil की पैकेजिंग पर “Heart Pro”, “Good Fats Balance” और “Lessorb Technology” जैसे दावे किए गए हैं.

FSSAI ने इन दावों के पीछे उपलब्ध वैज्ञानिक शोध और प्रमाण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.

यदि किसी उत्पाद को हृदय स्वास्थ्य से जोड़कर प्रचारित किया जाता है, तो उसके लिए मजबूत वैज्ञानिक आधार होना अनिवार्य माना जाता है.

4. Reman Noodles

Reman Noodles की पैकेजिंग पर “100% Natural” और “Freshly Made” जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है.

FSSAI ने पूछा है कि इन दावों का आधार क्या है और क्या ये वास्तव में उत्पाद की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को सही तरीके से दर्शाते हैं.

5. Bella Natural Paneer

Bella Natural Paneer के नाम में “Natural” शब्द का उपयोग किया गया है.

नियामक का कहना है कि यदि कोई उत्पाद Composite Food की श्रेणी में आता है, तो उसे “Natural” बताना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है.

इसी कारण कंपनी से इस ब्रांडिंग पर स्पष्टीकरण मांगा गया है.

इनके अलावा किन उत्पादों पर कार्रवाई हुई?

FSSAI द्वारा जिन अन्य उत्पादों और ब्रांड्स को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें शामिल हैं—

  • Silken Tofu
  • Incredio Gold Powder Vanilla
  • Orville Mountain Bawarchi
  • Buransh Squash
  • Raw Pressery Alphonso Mango Fruit Drink

इन सभी मामलों में नियामक ने संबंधित कंपनियों से उनके दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है.

FSSAI की कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?

आज का उपभोक्ता पहले से कहीं अधिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो चुका है.

लोग कम चीनी, कम फैट और प्राकृतिक उत्पादों की तलाश में रहते हैं. इसी प्रवृत्ति का लाभ उठाने के लिए कई कंपनियां आकर्षक शब्दों का इस्तेमाल करती हैं.

यदि ये दावे पूरी तरह प्रमाणित नहीं होते, तो उपभोक्ता गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी कर सकता है.

यही कारण है कि FSSAI समय-समय पर ऐसे दावों की समीक्षा करता है ताकि बाजार में पारदर्शिता बनी रहे और उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित रहे.

क्या हर “No Added Sugar” उत्पाद पूरी तरह शुगर फ्री होता है?

इस मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है.

उत्तर है— नहीं.

“No Added Sugar” का अर्थ यह नहीं होता कि उत्पाद में बिल्कुल भी शुगर नहीं है.

इसका मतलब केवल इतना होता है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान अलग से रिफाइंड चीनी नहीं मिलाई गई. यदि उत्पाद में फलों का रस, गन्ने का रस या अन्य प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं, तो उनमें प्राकृतिक शर्करा हो सकती है.

इसीलिए केवल पैकेट के सामने लिखे दावे पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है.

खरीदारी से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

यदि आप अपने परिवार के लिए सुरक्षित और सही उत्पाद चुनना चाहते हैं, तो इन बातों का पालन जरूर करें—

  • केवल सामने लिखे दावों पर भरोसा न करें.
  • हमेशा Ingredients List ध्यान से पढ़ें.
  • Nutrition Facts में शुगर, फैट और सोडियम की मात्रा देखें.
  • हेल्थ क्लेम वाले उत्पादों की तुलना दूसरे विकल्पों से करें.
  • बच्चों के लिए उत्पाद खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें.
  • यदि कोई दावा बहुत आकर्षक लगे, तो उसकी वास्तविक जानकारी भी जांचें.

उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश है?

FSSAI की यह कार्रवाई केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं है. यह पूरे फूड उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी दावे को बिना वैज्ञानिक आधार के प्रस्तुत नहीं किया जा सकता.

दूसरी ओर, यह उपभोक्ताओं के लिए भी एक सीख है कि केवल विज्ञापन या आकर्षक पैकेजिंग देखकर किसी उत्पाद को स्वस्थ मान लेना सही नहीं है.

एक जागरूक उपभोक्ता वही है जो खरीदारी से पहले उत्पाद की पूरी जानकारी पढ़े और समझदारी से निर्णय ले.

निष्कर्ष

बाजार में उपलब्ध हर पैकेज्ड फूड अपने आप में खराब नहीं होता, लेकिन हर हेल्थ क्लेम भी पूरी तरह सही हो, यह जरूरी नहीं है.

FSSAI द्वारा जारी किए गए नोटिस इस बात की याद दिलाते हैं कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर लिखे दावों की भी जवाबदेही तय होती है.

अगली बार जब आप “No Added Sugar”, “100% Natural”, “Healthy” या “Heart Pro” जैसे शब्द देखें, तो केवल उन दावों पर भरोसा न करें. पैकेट के पीछे लिखी सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और लेबल को ध्यान से पढ़ें.

जागरूक उपभोक्ता बनना ही स्वस्थ जीवन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत है.

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