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आउटसोर्सिंग: मैटरनिटी लीव लेने पर चली गई नौकरी, तीन महीने की बच्ची गोद में लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रही महिला

मध्यप्रदेश के सभी विभागों में पद खाली है लेकिन सरकार नियमित नियुक्ति पर जोर नहीं दे रही है. सरकार पक्की भर्ती कम करती है क्योंकि वेतन भत्ते आदि ज्यादा देने पड़ते हैं. प्रदेश के सभी सरकारी विभागों को काम चलाने के लिए सरकार कंपनियों को ठेका देती है और कंपनियां ठेके पर कर्मचारी सरकार को मुहैया कराती है. मध्यप्रदेश की 56 सरकारी विभागों में 80% कर्मचारी आउटसोर्स यानी सरकार का 80 फ़ीसदी कम ठेके पर चल रहा है.

सरकार निजीकरण कर एजेंसियों को आउटसोर्स कर्मचारियों की जिम्मेदारी देती है. इससे सरकार और कंपनी दोनों को मुनाफा होता है. लेकिन कर्मचारियों को न तो उचित वेतन मिलता है न ही जॉब की कोई गारंटी होती है. 

आउटसोर्स कर्मचारी में एक है रश्मि यादव जो की रीवा जिले के मैदानी मोहल्ले के रहने वाली हैं. इन्हें रीवा के सबसे बड़े और पुराने पीके बालिका विद्यालय में जून 2022 में आउटसोर्स चपरासी की नौकरी मिली. रीवा जिले में स्कूलों में ठेके पर कर्मचारी रखने का काम एमकॉम नाम की कंपनी देख रही है. एक साल बाद यानी जुलाई 2023 में इन्हें एक बेटी हुई. बेटी के जन्म के लिए रश्मि ने स्कूल से मैटरनिटी लीव यानी मातृत्व अवकाश लिया. लेकिन बेटी होने के बाद जब वापस ड्यूटी पर गईं तो उन्हें काम पर नहीं रखा गया. रश्मि को बताया गया कि उनके आवेदन की रिसीविंग नहीं है. कम पढ़ी-लिखी होने के कारण रश्मि के साथ यह धोखा हो गया. 

रश्मि ने अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला से लेकर जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल, जिला जनसुनवाई केंद्र, पीके स्कूल के प्राचार्य और अपने ठेकेदार यानी ऑउटसोर्स कंपनी के प्रभारी सबसे गुहार लगाई लेकिन रश्मि को कहीं से न्याय नहीं मिला. 

इस पूरे मसले पर विंध्य फर्स्ट ने प्रवीण कुमारी विद्यालय के प्राचार्य वरुणेंद्र प्रताप सिंह से बात की उनका कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति करने और उन्हें बर्खास्त करने की जिम्मेदारी कंपनी की है न की विद्यालय की.

रश्मि जैसी ही कहानी प्रदेश के बाकी 10 लाख ऑउटसोर्स कर्मचारियों की है. प्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्था हो या शिक्षा व्यवस्था, नगर निगम हो या कलेक्ट्रेट, यहां पीछे के दरवाजे से 80 प्रतिशत काम निजी ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है. किसी दुर्घटना स्थल में सबसे पहले पहुंचने वाला डायल 100, एंबुलेंस 108 सरकार की नहीं है. स्वास्थ्य विभाग में 3 लाख कर्मचारी हैं जिनमे 2.5 लाख ठेके पर हैं.

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