Vindhya First

रीवा: मॉडल कॉलेज में बस शुल्क विवाद गरमाया

रीवा: मॉडल कॉलेज में बस शुल्क विवाद गरमाया

रीवा: मॉडल कॉलेज में बस शुल्क विवाद गरमाया

रीवा: मध्यप्रदेश के रीवा जिले में स्थित पीएम एक्सीलेंस (मॉडल साइंस कॉलेज) में इन दिनों बस शुल्क को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. छात्रों से कथित तौर पर जबरन बस शुल्क वसूले जाने के आरोपों ने इस मुद्दे को तूल दे दिया है. इस फैसले के खिलाफ अब छात्र संगठन खुलकर सामने आ गए हैं और विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है.

NSUI ने उठाई छात्रों की आवाज

इस पूरे मामले को लेकर एनएसयूआई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) ने मोर्चा संभाल लिया है. संगठन के जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया. उन्होंने कॉलेज प्रशासन के फैसले को छात्र विरोधी बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया.

प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को प्रदेश स्तर तक पहुंचाते हुए उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा. इस दौरान उन्होंने मांग की कि छात्रों पर थोपे गए बस शुल्क को तुरंत वापस लिया जाए और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए.

रीवा: मॉडल कॉलेज में बस शुल्क विवाद गरमाया
रीवा: मॉडल कॉलेज में बस शुल्क विवाद गरमाया

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, मॉडल साइंस कॉलेज में छात्रों पर अनिवार्य रूप से बस शुल्क लागू किया गया है. जबकि कॉलेज में उपलब्ध बसों की संख्या सीमित है और उनका संचालन भी केवल दो राउंड में प्रस्तावित है.

ऐसे में हजारों छात्रों से एक समान शुल्क लेना कई सवाल खड़े करता है. खास बात यह है कि जो छात्र बस सेवा का उपयोग ही नहीं करते, उनसे भी यह शुल्क वसूला जा रहा है. इसी बात को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

पंकज उपाध्याय का बयान

NSUI जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने इस फैसले को पूरी तरह अनुचित बताया. उन्होंने कहा कि यह निर्णय छात्रों के हितों के खिलाफ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “जब कॉलेज में बसों की संख्या सीमित है और सभी छात्रों को सुविधा नहीं मिल रही, तो फिर सभी पर जबरन शुल्क क्यों थोपा जा रहा है? यह सीधा-सीधा अन्याय है.”

यह भी पढ़ें-मऊगंज: मऊगंज में अनोखा विरोध, अधिकारी न मिलने पर तहसील की चौखट को सौंपा ज्ञापन

गरीब छात्रों पर बढ़ रहा बोझ

मुद्दे का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय छात्रों पर पड़ रहा है. पहले ही शिक्षा से जुड़े खर्च बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त बस शुल्क उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है.

अभिभावकों का भी कहना है कि यदि उनका बच्चा बस सेवा का उपयोग नहीं करता, तो उनसे शुल्क लेना पूरी तरह गलत है. इससे परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ रहा है.

NSUI की प्रमुख मांगें

एनएसयूआई ने इस मामले में अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं। संगठन का कहना है कि:

  • बस शुल्क केवल उन्हीं छात्रों से लिया जाए, जो वास्तव में बस सेवा का उपयोग करते हैं.
  • सभी छात्रों पर एक समान शुल्क लागू करने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए.
  • कॉलेज प्रशासन इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और छात्रों से संवाद स्थापित करे.

10 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

NSUI ने प्रशासन को 10 दिनों का समय दिया है. संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे.

पंकज उपाध्याय ने कहा कि यह आंदोलन सैकड़ों छात्रों के साथ उग्र और व्यापक होगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बिना छात्रों की सहमति और जरूरत को समझे इस तरह के निर्णय लेना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संस्थान को फैसले लेते समय छात्रों की आर्थिक स्थिति और वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए.

क्या होगा आगे?

अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं. क्या कॉलेज प्रशासन इस विवाद का समाधान निकाल पाएगा या फिर रीवा में एक बड़ा छात्र आंदोलन देखने को मिलेगा—यह आने वाला समय ही बताएगा.

फिलहाल इतना जरूर है कि छात्रों की आवाज बुलंद हो चुकी है और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हैं.

यह भी पढ़ें- विंध्य: विंध्य क्षेत्र के लिए गेम चेंजर बनेगा एक्सप्रेसवे मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र को मिलेगा बड़ा फायदा