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रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप

रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप

रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप

रीवा: जिले की त्योंथर तहसील स्थित अमाव ग्राम पंचायत में पंचायत भवन निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है. गांव के एक व्यक्ति ने सरपंच, सचिव और अन्य लोगों पर न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद उनकी निजी भूमि पर पंचायत भवन का निर्माण कराने का आरोप लगाया है. शिकायतकर्ता का कहना है कि आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगने के बाद उन्हें लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है. मामला अब प्रशासन और पुलिस तक पहुंच चुका है. ऐसे में पूरे घटनाक्रम ने पंचायत की कार्यप्रणाली और निर्माण प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप
रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप

पंचायत भवन निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद

ग्राम अमाव निवासी नरेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया है कि जिस भूमि पर पंचायत भवन का निर्माण कराया जा रहा है, वह उनके स्वामित्व की जमीन है. उनका कहना है कि इस संबंध में न्यायालय से स्थगन आदेश भी जारी हो चुका है. इसके बावजूद निर्माण कार्य रोकने के बजाय लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है.

पीड़ित का दावा है कि संबंधित दस्तावेज राजस्व रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं. इसके बाद भी पंचायत स्तर पर उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया.

आरटीआई लगाने के बाद बढ़ा विवाद

नरेंद्र मिश्रा के अनुसार उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पंचायत भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी. उन्होंने भूमि चयन, स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का आवेदन दिया था.

उनका आरोप है कि आरटीआई आवेदन देने के बाद उन पर इसे वापस लेने का दबाव बनाया गया. जब उन्होंने आवेदन वापस लेने से इनकार किया तो उन्हें कथित रूप से धमकियां मिलने लगीं.

धमकी देने के लगाए आरोप

आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी गई. उनका कहना है कि लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है ताकि वह अपनी शिकायत वापस ले लें.

 इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी है. शिकायत में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने का आरोप

यह भी आरोप लगाया कि पंचायत पक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया. उनका कहना है कि वीडियो के माध्यम से पूरे मामले को अलग रूप देने का प्रयास किया गया.

दावा है कि रास्ता बंद होने से जुड़ा वीडियो वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता. उनका आरोप है कि इस तरह का वीडियो वायरल कर पंचायत भवन निर्माण और आरटीआई से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश की गई.

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प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

नरेंद्र मिश्रा ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

उन्होंने निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने और सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने का अनुरोध किया है. साथ ही यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है.

रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप
रीवा: पंचायत भवन निर्माण विवाद, निजी जमीन पर निर्माण का आरोप

पंचायत व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी निर्माण कार्य को लेकर स्वामित्व विवाद या न्यायालय का आदेश मौजूद हो तो संबंधित विभागों को पूरी प्रक्रिया की जांच के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए.

आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगना प्रत्येक नागरिक का कानूनी अधिकार है. ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई मिलना भी जरूरी माना जाता है.

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी है. प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत भवन निर्माण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं. साथ ही यह भी सामने आएगा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.

निष्कर्ष

रीवा के अमाव ग्राम पंचायत में पंचायत भवन निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है. निजी भूमि पर निर्माण, न्यायालय के स्थगन आदेश की अनदेखी, आरटीआई आवेदन के बाद कथित दबाव और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने जैसे आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है.

अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और आगे की कार्रवाई तय होगी.

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