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मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में छुआछूत पर सख्ती, सीएम बोले- समाज को जातिवाद से मुक्त करना लक्ष्य

मध्य प्रदेश में छुआछूत के खिलाफ सरकार का बड़ा संकल्प. गुरु रविदास जयंती पर सामाजिक समरसता अभियान और कलश वंदन यात्रा का शुभारंभ.

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में छुआछूत पर सख्ती, सीएम बोले- समाज को जातिवाद से मुक्त करना लक्ष्य

मध्य प्रदेश में सामाजिक समरसता को मजबूत करने और छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है. गुरु रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में छुआछूत जैसी प्रथा को किसी भी स्थिति में पनपने नहीं दिया जाएगा. सरकार का लक्ष्य समाज को जातिवाद और भेदभाव से मुक्त कर सामाजिक एकता को मजबूत करना है.

गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सामाजिक समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा का शुभारंभ किया. कार्यक्रम के दौरान संत रविदास के विचारों को याद करते हुए समाज में समानता, भाईचारे और मानव कल्याण की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया.

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छुआछूत के खिलाफ सरकार का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार समाज को जातिवाद और छुआछूत से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. प्रदेश में कहीं भी छुआछूत जैसी प्रथा को अपनाने या बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल सरकारी योजनाओं या अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाना होगा. जब तक समाज के हर वर्ग के बीच समानता और सम्मान की भावना मजबूत नहीं होगी, तब तक सामाजिक समरसता का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता.

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब देशभर में सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव को लेकर लगातार चर्चा होती रही है. सरकार की ओर से अब सामाजिक समरसता को जन-अभियान का रूप देने की बात कही जा रही है.

गुरु रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की पहल

गुरु रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संत रविदास के सामाजिक संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की बात कही गई. संत रविदास ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से सामाजिक समानता, मानवता और भेदभाव से मुक्त समाज का संदेश दिया था.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संत रविदास की जन्मस्थली से आए कलशों का पूजन किया और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की. इस दौरान विभिन्न स्थानों से आए प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

सरकार की योजना सामाजिक समरसता के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की है. इसके तहत कलश वंदन यात्रा और सामाजिक समरसता संकल्प अभियान जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा.

अयोध्या और उज्जैन का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश में हो रहे सांस्कृतिक और धार्मिक बदलावों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि समय के साथ देश में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं.

उन्होंने श्रीराम की नगरी अयोध्या में बन रहे नए स्वरूप और उज्जैन में धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के विकास का जिक्र किया. समाचार के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में संत रविदास की वस्तुओं और उनके जीवन से जुड़े स्मृति स्थलों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

इसके साथ ही संत रविदास महाराज की स्मृति और विचारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास की बात भी सामने आई.

सागर में बन रहा संत रविदास का भव्य मंदिर

मुख्यमंत्री ने संत रविदास के प्रति प्रदेश सरकार की श्रद्धा का उल्लेख करते हुए सागर में बन रहे संत रविदास महाराज के भव्य मंदिर और स्मारक का भी जिक्र किया.

समाचार के मुताबिक, इस परियोजना पर लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से काम किया जा रहा है. सरकार की ओर से इसे संत रविदास के विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है.

उज्जैन में भी संत रविदास से जुड़े स्मृति स्थलों और उनकी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में कार्य किए जाने की बात कही गई है.

गांव-गांव तक पहुंचेगा समरसता का संदेश

कार्यक्रम में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि संत रविदास जयंती के अवसर पर सामाजिक समरसता संकल्प अभियान और कलश वंदन यात्रा को प्रदेश के गांव-गांव तक ले जाया जाएगा.

इस पहल का उद्देश्य केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रहना, बल्कि संत रविदास के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना है. सरकार और संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी समाज के सभी वर्गों को इस अभियान से जोड़ने की बात कही.

पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य ने कहा कि गुरु रविदास महाराज ने सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा दी. उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं.

सामाजिक समरसता क्यों है जरूरी?

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में अलग-अलग जाति, समुदाय, भाषा और परंपराओं के लोग साथ रहते हैं. ऐसी स्थिति में सामाजिक एकता और आपसी सम्मान लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद बनते हैं.

छुआछूत केवल सामाजिक भेदभाव का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की गरिमा और समान अधिकारों से भी जुड़ा विषय है. किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव करना समाज में असमानता को बढ़ावा देता है.

इसीलिए सामाजिक समरसता का अर्थ केवल अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाना नहीं है. इसका वास्तविक अर्थ है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान, अवसर और अधिकार मिलें.

कानून के साथ सामाजिक सोच में बदलाव भी जरूरी

छुआछूत के खिलाफ कानून और सरकारी व्यवस्था पहले से मौजूद हैं, लेकिन किसी भी सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं होते. इसके लिए सामाजिक सोच में भी बदलाव जरूरी है.

गुरु रविदास के विचार इसी बदलाव की प्रेरणा देते हैं. उनका संदेश था कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्म और मानवीय मूल्यों से होनी चाहिए.

यही कारण है कि सामाजिक समरसता से जुड़े अभियानों में केवल सरकारी प्रतिनिधियों की भागीदारी पर्याप्त नहीं होगी. इसमें युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी.

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

मध्य प्रदेश सरकार ने छुआछूत और जातिगत भेदभाव के खिलाफ स्पष्ट संदेश जरूर दिया है, लेकिन असली चुनौती इसे जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की है.

गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक भेदभाव से जुड़े मामलों की निगरानी, पीड़ितों को त्वरित सहायता, कानूनों की जानकारी और जागरूकता अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

साथ ही सरकारी योजनाओं और अभियानों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी होगा.

गुरु रविदास का संदेश और आज का समाज

गुरु रविदास भारतीय संत परंपरा के उन प्रमुख संतों में शामिल हैं, जिन्होंने सामाजिक समानता और मानवता का संदेश दिया. उनके विचारों में जातिगत भेदभाव के बजाय इंसानियत और समानता को महत्व दिया गया.

आज जब समाज सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक के जरिए तेजी से बदल रहा है, तब भी सामाजिक भेदभाव और असमानता से जुड़े सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. ऐसे में गुरु रविदास के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण हो जाता है.

सरकार द्वारा गुरु रविदास जयंती के अवसर पर सामाजिक समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में देखी जा रही है.

निष्कर्ष

गुरु रविदास जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दिया गया संदेश स्पष्ट है—प्रदेश में छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज को जातिवाद और छुआछूत से मुक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

अब इस संकल्प की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह संदेश सरकारी कार्यक्रमों से निकलकर आम लोगों के व्यवहार और सामाजिक सोच का हिस्सा कितना बन पाता है.

संत रविदास का संदेश केवल एक जयंती तक सीमित नहीं है. समानता, सम्मान और मानवता पर आधारित समाज का निर्माण एक निरंतर प्रक्रिया है. यदि सरकार, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर इस दिशा में काम करें, तो सामाजिक समरसता का संकल्प वास्तव में जमीन पर बदलाव का माध्यम बन सकता है.

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