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मध्य प्रदेश: एमपी एथेनॉल राइस घोटाला, जांच तेज, 6 राइस मिलों पर शिकंजा

मध्य प्रदेश में कथित एथेनॉल राइस घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है. जांच एजेंसियों ने 6 राइस मिलों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि कई ट्रकों को जब्त कर दस्तावेजों, GPS रिकॉर्ड और FCI डिस्पैच डेटा की जांच की जा रही है

मध्य प्रदेश: एमपी एथेनॉल राइस घोटाला, जांच तेज, 6 राइस मिलों पर शिकंजा

मध्य प्रदेश में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजे गए सरकारी चावल के रास्ते में ही गायब होने और उसके कथित दुरुपयोग की जांच अब बड़े स्तर पर पहुंच चुकी है. जांच एजेंसियों ने बालाघाट, सिवनी और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से जुड़े करीब छह राइस मिलों को नोटिस जारी किए हैं.

प्रारंभिक जांच में इस मामले को केवल एक ट्रांसपोर्टिंग गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है. यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी खाद्यान्न वितरण व्यवस्था और एथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा.

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क्या है पूरा मामला?

सरकारी एजेंसियों के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा एथेनॉल उत्पादन के लिए सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया गया चावल अपने निर्धारित एथेनॉल प्लांट तक नहीं पहुंचा. जांच के दौरान पाया गया कि चावल की कुछ खेप रास्ते में ही दूसरे राइस मिलों तक पहुंच गई.

यही वजह है कि अब पुलिस, विशेष जांच दल (SIT) और अन्य एजेंसियां पूरे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की जांच कर रही हैं.

एफआईआर के बाद तेज हुई जांच

पूरा मामला तब सामने आया जब भारतीय खाद्य निगम (FCI) की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. शिकायत में आरोप लगाया गया कि चिन्हित एथेनॉल प्लांट के लिए भेजी गई चावल की खेप अपने गंतव्य तक पहुंचने के बजाय एक राइस मिल में पाई गई.

इसके बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मामले की गहन जांच शुरू की और अब जांच का दायरा कई जिलों तक बढ़ा दिया गया है.

छह राइस मिलों को जारी हुए नोटिस

जांच एजेंसियों ने अब तक बालाघाट, सिवनी और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की लगभग छह राइस मिलों को नोटिस भेजे हैं.

इन मिलों से पूछा गया है कि—

  • सरकारी चावल उनके यहां कैसे पहुंचा?
  • खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज कहां हैं?
  • ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड क्या बताते हैं?
  • स्टॉक रजिस्टर और बिलों में क्या दर्ज है?

जांच एजेंसियां दस्तावेजों का मिलान कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं.

1.4 लाख क्विंटल चावल की जांच

जांच अधिकारियों के अनुसार, लगभग 1.4 लाख क्विंटल सब्सिडी वाले चावल की आवाजाही संदेह के घेरे में है.

आरोप है कि इस चावल को खरीद, कस्टम मिलिंग और सरकारी खरीद प्रक्रिया के बीच कई बार घुमाकर दोबारा सरकारी एजेंसियों को बेचने की कोशिश की गई. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह सरकारी खरीद प्रणाली के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण माना जाएगा.

20 से अधिक ट्रक जब्त

जांच के दौरान अब तक लगभग 20 ट्रकों को जब्त किया जा चुका है.

इन ट्रकों में मौजूद चावल की जांच की जा रही है. साथ ही ट्रकों के दस्तावेज, GPS रिकॉर्ड, टोल प्लाजा की जानकारी और परिवहन संबंधी रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं.

ड्राइवर नहीं दिखा सके जरूरी दस्तावेज

जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, जिन ट्रकों को अब तक रोका गया, उनके अधिकांश चालक यह साबित नहीं कर सके कि चावल वास्तव में एथेनॉल प्लांट तक ही ले जाया जा रहा था.

इसी वजह से जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा हो गया है.

GPS और वेब्रिज डेटा से होगी सच्चाई उजागर

अब जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है.

जांच एजेंसियां निम्नलिखित रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं—

  • FCI डिस्पैच रिकॉर्ड
  • GPS ट्रैकिंग
  • वेब्रिज (तौल कांटा) की एंट्री
  • राइस मिल स्टॉक रजिस्टर
  • ट्रांसपोर्ट चालान
  • वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड

इन सभी दस्तावेजों के आधार पर हर ट्रक की वास्तविक यात्रा का पता लगाया जाएगा.

एफसीआई ने क्या कहा?

इस मामले में भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने कुछ मीडिया रिपोर्टों में किए गए बड़े दावों पर आपत्ति जताई है.

FCI का कहना है कि जांच अभी केवल 490 बोरी (लगभग 242.5 क्विंटल) चावल तक सीमित है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 5.6 लाख रुपये है.

निगम ने उन रिपोर्टों को गलत बताया है जिनमें लगभग 5 लाख टन चावल और 1,160 करोड़ रुपये की हेराफेरी का दावा किया गया था.

FCI के अनुसार—

  • इतनी बड़ी मात्रा में चावल की हेराफेरी की पुष्टि नहीं हुई है.
  • जांच सरकारी एजेंसियों ने स्वयं शुरू की थी.
  • मीडिया रिपोर्ट आने से पहले ही कार्रवाई शुरू हो चुकी थी.

क्या हो सकता है बड़ा खुलासा?

जांच अधिकारियों को आशंका है कि मामला केवल एक या दो ट्रकों तक सीमित नहीं है.

यदि जांच में दस्तावेजों और ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड में व्यापक गड़बड़ी मिलती है, तो कई और राइस मिल, ट्रांसपोर्टर तथा अन्य संबंधित लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं.

साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि सरकारी खाद्यान्न वितरण प्रणाली में कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था.

एथेनॉल परियोजनाओं पर भी उठेंगे सवाल

देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के तहत बड़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है.

ऐसे में यदि एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजे गए सरकारी चावल की आपूर्ति श्रृंखला में गड़बड़ी साबित होती है, तो इससे न केवल सरकारी राजस्व बल्कि खाद्यान्न प्रबंधन प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.

हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे.

प्रशासन की अगली कार्रवाई

फिलहाल जांच एजेंसियां—

  • नोटिस का जवाब मिलने का इंतजार कर रही हैं.
  • सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं.
  • ट्रकों की आवाजाही का डिजिटल विश्लेषण कर रही हैं.
  • संबंधित अधिकारियों और मिल संचालकों से पूछताछ कर रही हैं.
  • जरूरत पड़ने पर और लोगों को जांच के दायरे में लाने की तैयारी कर रही हैं.

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश का कथित एथेनॉल राइस घोटाला अब एक बड़े अंतरराज्यीय जांच का रूप ले चुका है. छह राइस मिलों को नोटिस जारी होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. दूसरी ओर, भारतीय खाद्य निगम ने करोड़ों रुपये के घोटाले संबंधी दावों का खंडन करते हुए कहा है कि जांच सीमित मात्रा के चावल तक ही संबंधित है.

अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर है, जो यह तय करेगी कि यह केवल परिवहन में हुई अनियमितता थी या फिर सरकारी खाद्यान्न व्यवस्था में किसी बड़े संगठित नेटवर्क का मामला.

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