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रीवा : वार्ड 16 में दूषित पेयजल पर भड़के महापौर

वार्ड 16 आदर्श नगर में दूषित पेयजल और सीवर लाइन की गंभीर समस्या पर महापौर अजय मिश्रा बाबा खुद मौके पर पहुंचे

रीवा : वार्ड 16 में दूषित पेयजल पर भड़के महापौर

रीवा नगर निगम के वार्ड क्रमांक 16 स्थित आदर्श नगर इन दिनों गंभीर पेयजल संकट और सीवर समस्या को लेकर चर्चा में है. पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र के नलकूपों से साफ पानी की जगह सीवर मिश्रित दूषित पानी निकलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं. स्थानीय रहवासियों ने कई बार नगर निगम को इसकी सूचना दी, लेकिन समय पर समाधान नहीं होने से लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला.

गुरुवार सुबह जब यह मामला और गंभीर हुआ, तब रीवा नगर निगम के महापौर अजय मिश्रा बाबा स्वयं अधिकारियों की टीम के साथ आदर्श नगर पहुंचे. मौके पर पहुंचकर उन्होंने हालात का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत कर समस्याओं की जानकारी ली.

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एक सप्ताह से गंदा पानी पीने को मजबूर लोग

आदर्श नगर के रहवासियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से उनके घरों में नलों और नलकूपों से गंदा, बदबूदार और सीवर मिश्रित पानी आ रहा है. इस दूषित पानी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.

लोगों ने बताया कि कई परिवारों में पेट दर्द, उल्टी, बुखार और संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं. इसके बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी समय पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे.

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतें बार-बार दर्ज कराने के बावजूद सफाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति की स्थिति जस की तस बनी रही. इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया.

महापौर ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

गुरुवार सुबह महापौर अजय मिश्रा बाबा ने कार्यपालन यंत्री, टेक्निकल टीम और अन्य अधिकारियों के साथ वार्ड 16 का निरीक्षण किया. उन्होंने सबसे पहले नलकूपों और सीवर लाइन की स्थिति देखी, जहां वास्तव में पानी में गंदगी और सीवर का मिश्रण पाया गया.

मौके पर मौजूद नागरिकों ने महापौर को बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और सफाई कर्मचारी क्षेत्र में नियमित रूप से नहीं आते. कई बार शिकायत करने के बाद भी केवल आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं.

यह सुनते ही महापौर का गुस्सा खुलकर सामने आ गया.

स्वास्थ्य अधिकारी की लापरवाही पर फूटा गुस्सा

निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी मुरारी कुमार मौके पर मौजूद नहीं थे. इस बात पर महापौर ने तत्काल फोन लगाकर उनसे जवाब मांगा.

फोन पर बातचीत के दौरान जब स्वास्थ्य अधिकारी ने क्षेत्र में लगातार भ्रमण करने का दावा किया, तब महापौर और अधिक नाराज हो गए. उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारी को फटकार लगाई.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महापौर ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि यदि जनता की समस्याओं के प्रति इसी तरह लापरवाही बरती गई, तो कार्रवाई बेहद कठोर होगी. इसी दौरान उनका एक बयान-“सीवेज लाइन में डाल दूंगा तुझे”-तेजी से चर्चा में आ गया.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

महापौर और स्वास्थ्य अधिकारी के बीच हुई फोन पर बातचीत का वीडियो मौके पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड कर लिया. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया.

वीडियो वायरल होने के बाद शहर में इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई. कुछ लोग महापौर के कड़े रुख को जनता के हित में जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग सार्वजनिक पद पर रहते हुए इस प्रकार की भाषा के प्रयोग को अनुचित मान रहे हैं.

हालांकि, अधिकांश स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों की जान जोखिम में हो, तो सख्ती जरूरी हो जाती है.

जनता ने कहा-सिर्फ कार्रवाई नहीं, स्थायी समाधान चाहिए

आदर्श नगर के निवासियों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें केवल निरीक्षण और नाराजगी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए. लोगों का कहना है कि हर बार समस्या होने पर अधिकारी आते हैं, जांच होती है, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर वही हो जाते हैं.

नागरिकों ने मांग की है कि-

  • सीवर लाइन की तत्काल मरम्मत की जाए
  • दूषित पेयजल की आपूर्ति तुरंत रोकी जाए
  • शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो
  • नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएं

लोगों का कहना है कि दूषित पानी केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य का सवाल है.

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

रीवा नगर निगम के लिए यह मामला केवल एक वार्ड की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है. यदि सीवर और पेयजल लाइनें एक-दूसरे को प्रभावित कर रही हैं, तो यह गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है. टाइफाइड, डायरिया, हैजा, पीलिया और संक्रमण जैसी बीमारियां फैल सकती हैं.

ऐसे में प्रशासन को त्वरित और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर काम करना होगा.

महापौर की सख्ती या प्रशासनिक दबाव?

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि महापौर का यह कड़ा रुख जनता के दबाव का परिणाम है या प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश.

जो भी हो, इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही अब सीधे जनता के आक्रोश का कारण बन रही है.

रीवा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में पेयजल, सफाई और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवाओं में सुधार अब प्राथमिकता बन चुका है.

निष्कर्ष

वार्ड 16 आदर्श नगर में दूषित पेयजल की समस्या ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महापौर अजय मिश्रा बाबा का गुस्सा भले ही सुर्खियों में हो, लेकिन असली मुद्दा है-जनता की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी.

यदि समय रहते सीवर और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो यह केवल एक वार्ड नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए स्वास्थ्य संकट बन सकता है.

अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन केवल सफाई देता है या वास्तव में जमीन पर बदलाव भी दिखाई देता है.

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