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Toggleरीवा अधिवक्ता चुनाव में पोस्टर विवाद, कार्रवाई की मांग तेज
रीवा जिले में जिला अधिवक्ता संघ चुनाव को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, चुनावी माहौल के बीच न्यायालय परिसर और शहर में लगाए गए पोस्टर-बैनर अब चर्चा का विषय बन गए हैं. जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा के अधिवक्ता आनंद तिवारी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी को आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कई प्रत्याशियों ने न्यायालय परिसर और शहर की दीवारों पर पोस्टर, पंपलेट और बैनर लगाकर नियमों का उल्लंघन किया है. इस शिकायत के बाद अधिवक्ताओं के बीच चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
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क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से 2 अप्रैल 2026 को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया था. इस पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि जिला अधिवक्ता संघ चुनाव के दौरान नए और पुराने न्यायालय भवन परिसर के साथ-साथ शहर में भी किसी प्रकार के पोस्टर, पंपलेट या बैनर नहीं लगाए जाएंगे.
इस निर्देश का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, स्वच्छ और निष्पक्ष बनाए रखना था. साथ ही न्यायालय परिसर की गरिमा बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया था.
लेकिन इन निर्देशों के बावजूद कई प्रत्याशियों द्वारा न्यायालय परिसर और शहर के विभिन्न स्थानों पर पोस्टर-बैनर लगाए जाने की खबरें सामने आईं. यही मुद्दा अब विवाद का कारण बन गया है.
अधिवक्ता आनंद तिवारी ने उठाए गंभीर सवाल
जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा के अधिवक्ता आनंद तिवारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दिए गए आवेदन में सवाल उठाया है कि जब पोस्टर-बैनर लगाने पर पहले से प्रतिबंध था, तो फिर इन अवैध प्रचार सामग्री को हटवाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
उन्होंने यह भी पूछा कि संबंधित प्रत्याशियों के खिलाफ अब तक कोई अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई. उनका कहना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो उनका पालन भी समान रूप से होना चाहिए.
आनंद तिवारी ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि अधिवक्ताओं के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि कहीं यह सब निर्वाचन अधिकारी की मौन सहमति से तो नहीं हो रहा. यदि ऐसा है, तो यह चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है.
न्यायालय परिसर की गरिमा पर सवाल
न्यायालय परिसर केवल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह न्याय व्यवस्था की गरिमा और अनुशासन का प्रतीक भी माना जाता है. ऐसे में चुनावी प्रचार के नाम पर पोस्टर-बैनर लगाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि न्यायालय की मर्यादा को भी प्रभावित करता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यायालय परिसर में ही चुनावी नियमों की अनदेखी होगी, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है. यही कारण है कि इस मामले को अधिवक्ता समुदाय गंभीरता से देख रहा है.
अधिवक्ता संघ चुनाव में बढ़ी हलचल
जिला अधिवक्ता संघ चुनाव हमेशा से प्रतिष्ठा और प्रभाव का चुनाव माना जाता है. इसमें विभिन्न पदों के लिए प्रत्याशी सक्रिय रहते हैं और अधिवक्ताओं के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं.
इस बार पोस्टर-बैनर विवाद ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है. कई अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो चुनाव प्रक्रिया पर अविश्वास बढ़ सकता है.
चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखना निर्वाचन अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. ऐसे में इस शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.
आवेदन में क्या की गई मांग
अधिवक्ता आनंद तिवारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि-
- बिना अनुमति लगाए गए सभी पोस्टर और बैनर तत्काल हटाए जाएं
- नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों की पहचान की जाए
- संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए
- न्यायालय परिसर में चुनाव संबंधी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए यह जरूरी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो.
अधिवक्ताओं के बीच चर्चा तेज
इस शिकायत के बाद जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है. कई लोग इसे चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहे हैं.
यदि मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया में विश्वास मजबूत होगा. वहीं यदि शिकायत को नजरअंदाज किया जाता है, तो विवाद और गहरा सकता है.
निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है सख्ती
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती नियमों के पालन पर निर्भर करती है. जिला अधिवक्ता संघ जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में यदि नियमों की अनदेखी होती है, तो यह पूरे चुनाव की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है.
पोस्टर-बैनर विवाद केवल प्रचार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह चुनाव की निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है. अब देखना होगा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या न्यायालय परिसर में चुनावी अनुशासन को सख्ती से लागू किया जाता है.