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Toggleरीवा: जवा में अफसरों की क्लास, विधायक दिव्यराज सिंह सख्त
रीवा जिले के जवा मुख्यालय में आयोजित जन समीक्षा अभियान की बैठक इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है. राज पैलेस में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विधायक दिव्यराज सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के साथ विभिन्न जनसमस्याओं पर गंभीर समीक्षा की. बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में लंबित समस्याओं का त्वरित समाधान और जनकल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था.
इस दौरान विधायक का सख्त और स्पष्ट रुख देखने को मिला. उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनता की समस्याओं की अनदेखी अब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी. पेयजल संकट, नल-जल योजना, राजस्व प्रकरण, पंचायत व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, विद्युत व्यवस्था और अन्य विकास कार्यों को लेकर उन्होंने जवाबदेही तय करने पर जोर दिया.
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जन समीक्षा बैठक में बड़ी संख्या में अधिकारी रहे मौजूद
राज पैलेस में आयोजित इस बैठक में प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों की बड़ी उपस्थिति रही. अनुविभागीय अधिकारी पीयूष भट्ट, एसडीओपी नारायण सिंह कुंम्हरे, जनपद पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर, तहसीलदार जितेंद्र तिवारी, नायब तहसीलदार निवेदिता त्रिपाठी, बीएमओ रावेंद्र सिंह सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए.
इसके साथ ही सभी पंचायतों के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और पटवारी भी बैठक का हिस्सा बने. यह उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि बैठक केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने का एक गंभीर प्रयास था.
पेयजल संकट पर सबसे ज्यादा फोकस
गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विधायक ने सबसे पहले पेयजल व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि गांवों में पानी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए.
खराब हैंडपंपों की मरम्मत, बंद पड़े नलों को चालू कराने और नल-जल योजना के तहत नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. विधायक ने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर पेयजल संकट से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इस मुद्दे पर विधायक की सख्ती को जनता ने सकारात्मक रूप में देखा.
किसानों से जुड़े मामलों पर राजस्व विभाग को निर्देश
बैठक के दौरान राजस्व विभाग से जुड़े मामलों पर भी गंभीर चर्चा हुई. किसानों की जमीन, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा और अन्य लंबित राजस्व प्रकरणों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए.
विधायक ने कहा कि किसानों को छोटे-छोटे कामों के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए. प्रशासन का दायित्व है कि समय पर समाधान उपलब्ध कराया जाए.
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि किसान हित सर्वोपरि हैं और उनकी समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं होगी.
पंचायत स्तर की शिकायतों पर सख्त रुख
जनपद पंचायत अधिकारियों को भी विधायक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए. उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहिए.
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे जनता में असंतोष बढ़ता है. इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि शिकायतें लगातार मिलती रहीं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय होगी.
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को भी जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी.
सरपंच, सचिव और पटवारियों को चेतावनी
बैठक के दौरान विधायक ने सरपंचों, सचिवों और पटवारियों को भी सीधे तौर पर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और शिकायतें लगातार सामने आती रहीं, तो सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
यह बयान बैठक का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया. कई पंचायत प्रतिनिधियों ने इसे प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जवाबदेही तय करने का मजबूत संकेत माना.
विधायक ने साफ कहा कि जनता के साथ अन्याय और विकास कार्यों में लापरवाही अब नहीं चलेगी.
स्वास्थ्य और विद्युत व्यवस्था पर भी समीक्षा
बैठक में स्वास्थ्य विभाग और बिजली व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, अस्पतालों में स्टाफ की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई.
इसके साथ ही विद्युत विभाग को भी बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार होने वाली कटौती की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए गए. जनता की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े इन दोनों विभागों पर विधायक ने विशेष निगरानी रखने की बात कही.
ग्रामीणों के बीच चर्चा- क्या बदलेगी जमीनी हकीकत?
बैठक समाप्त होने के बाद ग्रामीणों के बीच इस समीक्षा अभियान को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. लोगों का कहना है कि इस तरह की बैठकें यदि नियमित रूप से हर महीने हों, तो प्रशासनिक सुधार संभव है.
कई ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि वर्षों बाद हुई इस समीक्षा बैठक का वास्तविक असर क्या जमीनी स्तर पर दिखाई देगा, या फिर यह भी केवल एक औपचारिक सरकारी प्रक्रिया बनकर रह जाएगी.
जनता का मानना है कि बैठकों से अधिक जरूरी है उनका परिणाम. यदि समस्याओं का समाधान समय पर होता है, तभी ऐसी बैठकों का महत्व साबित होगा.
विधायक का स्पष्ट संदेश
बैठक के अंत में विधायक दिव्यराज सिंह ने साफ शब्दों में कहा-
“जनता की समस्याओं का समाधान ही प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.”
यह बयान केवल एक संदेश नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट निर्देश के रूप में देखा जा रहा है. जनता की अपेक्षाएं अब इस बात पर टिकी हैं कि बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से होता है.
निष्कर्ष
जवा में आयोजित यह जन समीक्षा बैठक केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जनहित की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है. विधायक दिव्यराज सिंह का सख्त रुख यह संकेत देता है कि अब क्षेत्रीय समस्याओं को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.
यदि प्रशासन वास्तव में सक्रिय होकर कार्य करता है, तो पेयजल, स्वास्थ्य, राजस्व और पंचायत स्तर की कई पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है. अब देखना यह होगा कि यह सख्ती जमीनी बदलाव में बदलती है या फिर केवल बैठकों तक सीमित रह जाती है.
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