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Toggleरीवा में सड़क घोटाला: 5 साल की गारंटी, कुछ महीनों में बर्बाद सड़क
मध्य प्रदेश में सरकार लगातार विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़कों के जाल बिछाने के दावे करती रही है. लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आती है. ताजा मामला रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है, जहां करोड़ों की लागत से बनी सड़क कुछ ही महीनों में बदहाल हो गई.
यह मामला न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी निगरानी और जवाबदेही की भी पोल खोलता है.
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3.18 करोड़ की सड़क, लेकिन हालत बदतर
मनगवां क्षेत्र के ग्राम तिवनी के चौथियान टोला से आलमगंज परौहन टोला तक करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण वर्ष 2023 में किया गया था. इस परियोजना पर लगभग 318.36 लाख रुपये खर्च किए गए.
इस सड़क का निर्माण मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराया गया था, और इसकी गारंटी वर्ष 2028 तक बताई गई थी. यानी सड़क को कम से कम पांच साल तक टिकाऊ रहना था.
लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है.
शुरुआत से ही उखड़ने लगी सड़क
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क बनने के कुछ ही महीनों बाद इसकी हालत खराब होने लगी.
- जगह-जगह से गिट्टी बाहर निकल चुकी है
- डामर की परत गायब हो चुकी है
- सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है
- कई हिस्सों में सड़क पूरी तरह टूट चुकी है
स्थिति इतनी खराब है कि इस सड़क पर चलना भी जोखिम भरा हो गया है.
सीधे शब्दों में कहा जाए तो:
“गारंटी पांच साल की… सड़क कुछ महीनों की!”
जिम्मेदार कौन?
निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड में अधिकारियों के नाम बड़े अक्षरों में दर्ज हैं—
- कार्यपालन यंत्री
- अनुविभागीय अधिकारी
- अन्य संबंधित अधिकारी
लेकिन सड़क की हालत देखकर यह सवाल उठता है कि क्या केवल नाम दर्ज करना ही जिम्मेदारी निभाना है, या काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है?
स्थानीय लोगों का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई.
उनके मुताबिक:
- निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया
- घटिया सामग्री का उपयोग किया गया
- ठेकेदारों को खुली छूट दी गई
- विभागीय निगरानी पूरी तरह कमजोर रही
एक स्थानीय निवासी ने कहा:
“सड़क बनते ही टूटने लगी थी, लेकिन किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया. अब हालत यह है कि पूरा पैसा बर्बाद हो गया.”
विकास के दावों पर सवाल
यह मामला सीधे तौर पर सरकार के विकास मॉडल पर सवाल खड़ा करता है.
जब करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़क कुछ महीनों में ही खराब हो जाए, तो यह केवल एक निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है.
सवाल यह भी है कि:
- क्या निर्माण से पहले गुणवत्ता की जांच हुई थी?
- क्या काम के दौरान किसी प्रकार की मॉनिटरिंग हुई?
- क्या ठेकेदार और अधिकारियों के बीच मिलीभगत थी?
क्या होगी जांच?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
यदि जांच होती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:
- किस स्तर पर लापरवाही हुई
- किन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है
- ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होगी
जवाबदेही तय होगी या नहीं?
इस तरह के मामलों में अक्सर देखा गया है कि:
- शुरुआती जांच की घोषणा होती है
- कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है
- जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती
लेकिन यदि इस मामले में भी ऐसा ही हुआ, तो यह जनता के विश्वास को और कमजोर करेगा.
जनता की मांग
स्थानीय लोग अब खुलकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय जांच
- दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई
- सड़क का पुनर्निर्माण
- भविष्य में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी
निष्कर्ष
रीवा के मनगवां क्षेत्र की यह सड़क सिर्फ एक खराब निर्माण का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की कहानी है जिसमें जवाबदेही की कमी और लापरवाही हावी है.
जब जनता के पैसे से बनने वाली परियोजनाएं इस तरह फेल होती हैं, तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि विकास की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या यह भी अन्य मामलों की तरह सिर्फ एक खबर बनकर रह जाएगा
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