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Toggleरीवा: महिला की दर्दनाक गुहार, थैलेसिमिया पीड़ित बच्चे संग पहुंची थाने
रीवा: रीवा में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला अपने थैलेसिमिया से ग्रसित दूधमुंहे बच्चे को लेकर न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंची. महिला ने अपने पति और सास-ससुर पर दहेज उत्पीड़न और घर से बाहर निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.
यह घटना शहर के सिविल बिछिया थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जिसने एक बार फिर घरेलू हिंसा और दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है.
6 साल से झेल रही थी प्रताड़ना
पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी को करीब 6 साल हो चुके हैं. शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा लगातार उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. महिला का कहना है कि उसके पति और सास-ससुर दहेज के लालच में उसे परेशान करते रहे.
पीड़िता ने बताया कि इस मामले को लेकर पहले से ही कोर्ट में केस चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद ससुराल वालों का व्यवहार नहीं बदला.
करोड़ों की संपत्ति बेचने का आरोप
महिला ने अपने पति पर गंभीर आर्थिक आरोप भी लगाए हैं. उसके अनुसार, पति एक बिजनेसमैन है और उसने पहले ही करोड़ों रुपये के दो मकान बेच दिए हैं. इतना ही नहीं, हाल ही में सिलाई मशीन का एक शो-रूम भी बेच दिया गया है.
पीड़िता का आरोप है कि इन सबके बावजूद उसे और उसके बच्चे को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है.
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थैलेसिमिया पीड़ित बच्चे के साथ घर से निकाला
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महिला ने आरोप लगाया कि मंगलवार को उसके पति और सास-ससुर ने उसे और उसके गंभीर रूप से बीमार बच्चे को लात मारकर घर से बाहर निकाल दिया.
बच्चा थैलेसिमिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है, जिसमें नियमित इलाज और देखभाल की जरूरत होती है. ऐसे में मां और बच्चे को घर से निकालना बेहद अमानवीय कृत्य माना जा रहा है.
थाने-थाने भटकती रही पीड़िता
न्याय की उम्मीद में महिला सबसे पहले बिछिया थाना पहुंची, जहां से उसे महिला थाने भेज दिया गया. लेकिन वहां पहुंचने पर उसे कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला.
इसके बाद महिला अपनी शिकायत लेकर सिविल लाइन थाना पहुंची, लेकिन वहां से भी उसे निराशा ही हाथ लगी. पीड़िता का कहना है कि उसे कहीं भी तुरंत मदद नहीं मिली, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई.
सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ जहां महिला अपने बीमार बच्चे के साथ दर-दर भटकती रही, वहीं दूसरी ओर उसे समय पर मदद नहीं मिल पाई.
यह घटना दिखाती है कि जमीनी स्तर पर अभी भी पीड़ित महिलाओं को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है.
दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा की हकीकत
यह मामला समाज में फैली दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा की गंभीर समस्या को उजागर करता है. कानून बनने के बावजूद आज भी कई महिलाएं इस तरह की प्रताड़ना का सामना कर रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके.
निष्कर्ष
रीवा में सामने आया यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है. जरूरत है कि ऐसे मामलों में प्रशासन तुरंत और सख्ती से कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित महिला और उसके बच्चे को न्याय मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
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