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चुनावी वादे पूरे न होने से गुस्साए किसानों ने 50 ट्रैक्टर के साथ रीवा में निकाली रैली

रीवा में गुस्साए किसान

जब पूरा देश राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बड़ी ही शान के साथ देश का 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा था तब रीवा में गुस्साए किसानों ने सरकार के ख़िलाफ़ रैली निकालने का फ़ैसला कर लिया. करहिया मंडी से किसान मोर्चा ने क़रीब 50 ट्रैक्टर के साथ रीवा में रैली निकाली. रीवा के कॉलेज चौराहा होती हुई ये रैली कलेक्ट्रेट तक पहुँची और किसानों ने राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन सौंपा. नक़ली बीज और कमीशन खोरी को लेकर ग़ुस्साए किसानों का आरोप है कि चुनाव के दौरान सरकार ने उनसे जितने भी वादे किए थे उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया.

किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ये बताए कि किसानों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी प्रशासन की है या नहीं. अगर ये ज़िम्मेदारी प्रशासन की है तो आवारा पशुओं की समस्या का समाधान करें. वेटरनरी की वैन भेजकर गाँव के आवारा आशू और भारतीय जनता पार्टी के लोगों द्वारा छोड़े गए आवारा पशुओं को बुलाकर गौशाला भेजे.

किसान सुब्रतमणि त्रिपाठी का कहना है कि किसानों की समस्या इतनी बड़ी है कि दिल्ली में एक साल से भी ज़्यादा वक़्त तक आंदोलन चला और कई किसान शहीद भी हो गए. उसके बाद किसान बिल वापस ले लिया गया. उसके बाद किसानों को ये गारंटी दी गई कि फसलों के लिए स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करेंगे साथ फसलों का सही दाम किसानों को दिया जाएगा.

किसानों ने कहा कि साल 2014 के चुनाव में भी ये वादा किया गया था कि किसानों को सही दाम और 50 प्रतिशत मुनाफ़ा दिया जाएगा. लेकिन ये आज तक लागू नहीं हुआ. किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं. लगातार महंगाई और बेरोज़गारी बढ़ रही है. कभी रेलवे तो कभी एरोड्रम के नाम पर किसानों की ज़मीनें लूटी जा रही हैं. जब किसानों की ज़मीनें ही नहीं रहेंगी तो अनाज कहां से होगा. आवारा पशुओं की समस्या इतनी बड़ी है कि किसान रात भर अपने खेत की रखवाली करते हैं. हम प्रधानमंत्री और प्रशासन से निवेदन करते हैं कि किसानों से जो वादे किए गए थे उसे पूरा करिए.

किसानों और क्या कुछ कहा, उनकी क्या मांगें है जानने के लिए पूरा वीडियो ज़रूर देखिए