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वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ गिरिजा शंकर से लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर चर्चा

राजनीतिक विशेषज्ञ गिरिजा शंकर

2023 विधानसभा चुनाव होने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीतिक पार्टियों में हलचलें तेज हो गई है. इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को तीन राज्यों में प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल हुई. वहीं कांग्रेस को तीनों ही राज्यों में करारी हार का सामना करना पड़ा. अब पूरे देश में लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में विंध्य फर्स्ट ने वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ गिरिजा शंकर से लोकसभा चुनाव को मद्दे नजर रखते हुए बात किया. 

सवाल:  कमलनाथ कांग्रेस से बीजेपी में जाते-जाते फिर रुक क्यों गए?

जवाब: कमलनाथ के बीजेपी में जाने की चर्चाएं बिल्कुल भी गलत नहीं थी. इस बात को कतई अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि वो बीजेपी में शामिल हो रहे थे. कमलनाथ के तीखे बर्ताव के चलते मध्यप्रदेश कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक उठा-पटक की हलचलें तेज हो गई. कमलनाथ को ऐसा लगने लगा था कि कांग्रेस पार्टी में उनको 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है. जिसके चलते वो बीजेपी में जाने का मन बना रहे थे. लेकिन अचानक इन तमाम अटकलों के बीच कमलनाथ का एक बयान सामने आता है कि वो कांग्रेस पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं. वहीं इस मामले में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कमलनाथ की बीजेपी में शायद बातें नहीं मानी गई होंगी इसलिए  कांग्रेस पार्टी छोड़कर नहीं गए. हालांकि कमलनाथ के इस बर्ताव से उन्हें तो कोई फायदा नहीं हुआ, लेकिन बीजेपी को जरूर अच्छा खासा फायदा मिला है.      

सवाल:  लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्ष की क्या स्थिति होगी ?

जवाब: विपक्ष के INDIA गठबंधन बीजेपी को नुकसान नहीं बल्की फायदा ही होगा. क्योंकि विपक्ष में कांग्रेस के सिवा कोई भी पार्टी बीजेपी को टक्कर देने के लिए सामने ही नहीं आती. इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत नहीं है, कि राज्य स्तरीय पार्टीयों के गठबंधन से बीजेपी को कोई भी नुकसान नहीं हो सकता है. क्योंकि ये पार्टियां केवल एक या दो राज्यों तक ही सीमित रह जाती हैं. जिस तरह से बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में 2019 के चुनाव में  जीतती आई है.  अभी तक देश की कुल सीटों में से 200 सीटों पर मुकाबला हमेशा दो के बीच यानी बीजेपी और कांग्रेस के बीच होता आया है. ठीक उसी तरह से 2024 में बीजेपी 200 सीटों में से 90% सीटों पर बहुमत के साथ चुनाव जीतेगी. इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की खुद की कमजोरी है. राजनीतिक विश्लेषज्ञों का मानना है कि जब कांग्रेस बीजेपी चुनाव में आमने-सामने तब हमेशा से ही मुकाबला एक तरफा हो जाता है.

सवाल: कांग्रेस पार्टी के कमजोर होने के पीछे किसका हाथ है?

जवाब: कांग्रेस पार्टी के कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा हाथ पार्टी के लीडरों का है. क्योंकि कोई भी कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे नहीं हटता, बल्कि नेतृत्वकर्ता ही उचित राय मसबरा नहीं देते. गिरिजाशंकर कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी के कमजोरियों पर हजारों पन्ने की किताब लिखी जा सकती है.

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