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Toggleशहडोल: बंद पुल पर भड़के ग्रामीण, सांसद का काफिला रोका!
शहडोल: शहडोल के ब्यौहारी क्षेत्र में ग्रामीणों ने सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा का काफिला रोककर झापर नदी पुल चालू कराने और भूमि मुआवजे की मांग उठाई. करीब एक घंटे तक चला विरोध.
जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में उस समय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया, जब सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा का काफिला ग्रामीणों ने बीच रास्ते में रोक लिया. ग्रामीण वर्षों से लंबित अपनी मांगों को लेकर नाराज थे. उनका कहना है कि झापर नदी पर बना पुल करीब तीन साल पहले तैयार हो चुका है, लेकिन आज तक आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया.
आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है. इसी वजह से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. सांसद के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रखीं.
जन चौपाल में जाते समय रोका गया काफिला
सीधी संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ब्यौहारी विधानसभा के ग्राम कोना टोला में आयोजित जन चौपाल कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे. उनके साथ ब्यौहारी विधायक शरद जुगलाल कोल भी मौजूद थे.रास्ते में भमरहा प्रथम गांव के ग्रामीणों ने उनका काफिला रोक लिया. ग्रामीणों की संख्या काफी थी और सभी अपनी समस्याओं को लेकर आक्रोशित दिखाई दे रहे थे.
अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन के कारण सांसद का काफिला करीब एक घंटे तक मौके पर ही रुका रहा. इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी मांगों और समस्याओं को विस्तार से रखा.
तीन साल से तैयार है झापर नदी का पुल
झापर नदी पर बना पुल करीब तीन वर्ष पहले पूरी तरह तैयार हो चुका है. पुल निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इससे आवागमन आसान हो जाएगा.हालांकि पुल तैयार होने के बावजूद आज तक उसे जनता के लिए शुरू नहीं किया गया. इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है. लोगों को नदी पार करने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. कई बार मरीजों, छात्रों और किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
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मुआवजा नहीं मिलने से नाराज किसान
विरोध का सबसे बड़ा कारण भूमि अधिग्रहण का मामला बताया जा रहा है.स्थानीय किसानों का कहना है कि पुल के दोनों ओर पहुंच मार्ग बनाने के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी. प्रशासन ने मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया था.लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी प्रभावित किसानों को पूरी राशि नहीं मिल सकी. इससे किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ती गई.ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा और पुल शुरू नहीं होगा, तब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता.
सांसद के सामने रखी गईं समस्याएं
सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के सामने पुल और मुआवजे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया.लोगों ने बताया कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए गए. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ.
लोगों ने कहा कि पुल बनकर तैयार है, फिर भी उसका लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा. इससे सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.सांसद ने ग्रामीणों की बातें सुनीं और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने का भरोसा दिलाया.
विकास कार्यों पर उठे सवाल
इस घटना ने क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल का उपयोग नहीं हो पाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.
यदि पुल समय पर शुरू हो जाता, तो क्षेत्र के लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलती. साथ ही किसानों, छात्रों और व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलता.ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब परियोजनाएं समय पर पूरी होने के बाद जनता के लिए शुरू भी की जाएं.
जनप्रतिनिधियों के सामने बढ़ती चुनौतियां
सांसद का काफिला रोकना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याएं अब भी अनसुलझी हैं.जनप्रतिनिधियों के दौरे के दौरान अक्सर लोग अपनी मांगों को लेकर सामने आते हैं, लेकिन इस बार विरोध का तरीका अलग था.
ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं. उनका मानना है कि वर्षों से लंबित मुद्दों पर अब ठोस कार्रवाई होनी चाहिए.
निष्कर्ष
भमरहा प्रथम गांव में सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के काफिले को रोककर ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की. झापर नदी पर बना बंद पुल और भूमि अधिग्रहण का लंबित मुआवजा इस विरोध का मुख्य कारण रहा.
करीब एक घंटे तक चले इस घटनाक्रम ने क्षेत्र की पुरानी समस्याओं को फिर चर्चा में ला दिया है. अब लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं. ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही पुल शुरू होगा और प्रभावित किसानों को उनका उचित मुआवजा मिलेगा.
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