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मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू

मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू

मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू

 मैहर: मध्य प्रदेश के मैहर जिले का छिरहाई गांव इन दिनों भीषण जल संकट का सामना कर रहा है. सरकारी रिकॉर्ड में गांव को पेयजल संसाधनों से समृद्ध बताया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. करीब 4500 की आबादी वाले इस गांव में लोग आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं.ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारी आंकड़ों और जमीनी सच्चाई के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है?

मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू
मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू

छिरहाई गांव में गहराया जल संकट

मैहर जिले की ग्राम पंचायत छिरहाई में इन दिनों पानी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है. गांव की आबादी लगभग 4460 है और यहां 1105 परिवार निवास करते हैं. गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट भी लगातार गंभीर होता जा रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मौजूद अधिकांश हैंडपंप खराब हैं. कुछ हैंडपंप ऐसे हैं जो चालू तो होते हैं, लेकिन कुछ ही देर बाद पानी देना बंद कर देते हैं. परिणामस्वरूप लोगों को घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.

सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है. सुबह होते ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं और कई बार लोगों को खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ता है.

मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू
मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू

सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

43 हैंडपंप दर्ज, लेकिन पानी नहीं

सरकारी अभिलेखों के अनुसार छिरहाई गांव में कुल 43 हैंडपंप मौजूद हैं. लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से अधिकांश पूरी तरह खराब हो चुके हैं.गांव में केवल एक हैंडपंप ही ऐसा है जिससे नियमित रूप से पानी निकल रहा है. हालांकि उससे भी सीमित मात्रा में ही पानी मिलता है. ग्रामीणों के अनुसार लगभग 10 से 20 डिब्बा पानी निकलने के बाद वह भी जवाब दे देता है.यही वजह है कि जल संकट लगातार गहराता जा रहा है और लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है.

महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

पानी की कमी का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है. कई परिवारों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है क्योंकि उन्हें पानी लाने में समय देना पड़ रहा है.वहीं महिलाएं सुबह से लेकर देर शाम तक पानी की व्यवस्था में जुटी रहती हैं. इससे उनके दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं.

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जल जीवन मिशन बना सवालों के घेरे में

पाइपलाइन और नल बने शोपीस

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है. लेकिन छिरहाई गांव में यह योजना केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है.ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाई गई और घरों तक नल कनेक्शन भी दिए गए. लेकिन इन नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है.लोगों का आरोप है कि योजना का प्रचार तो बड़े स्तर पर किया गया, लेकिन उसका वास्तविक लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाया.

करोड़ों की योजनाएं, फिर भी जल संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पेयजल योजना की सफलता केवल निर्माण कार्यों से नहीं बल्कि उसके नियमित संचालन और रखरखाव से तय होती है.यदि पाइपलाइन और नल लगाने के बाद उनमें पानी ही नहीं पहुंचे तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है. छिरहाई गांव का मामला भी इसी ओर संकेत करता है.

मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू
मैहर न्यूज़: जल संकट से बेहाल गांव, 43 हैंडपंप में एक चालू

पशुओं के सामने भी खड़ा हुआ संकट

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

छिरहाई गांव की बड़ी आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है. ऐसे में जल संकट का असर केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है.पशुओं के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. इससे दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपने पशुओं को पानी पिलाने के लिए भी दूर-दराज के स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है.

ग्रामीणों ने उठाई समाधान की मांग

खराब हैंडपंपों की मरम्मत जरूरी

ग्रामीणों की मांग है कि गांव के सभी खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके.उनका कहना है कि यदि अधिकांश हैंडपंप चालू हो जाएं तो मौजूदा जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है.

जल जीवन मिशन को किया जाए प्रभावी

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन और नल कनेक्शनों को जल्द चालू कराया जाए.लोगों का कहना है कि यदि योजना सही तरीके से संचालित हो तो हजारों लोगों को स्थायी राहत मिल सकती है.

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जिम्मेदार विभाग की चुप्पी पर सवाल

गांव में लगातार बढ़ रहे जल संकट के बावजूद अब तक किसी बड़े समाधान की घोषणा नहीं हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.

निष्कर्ष

मैहर जिले का छिरहाई गांव इस समय सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर की एक बड़ी मिसाल बन गया है. एक ओर रिकॉर्ड में 43 हैंडपंप और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का उल्लेख है, वहीं दूसरी ओर हजारों ग्रामीण भीषण जल संकट झेल रहे हैं. यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या केवल पेयजल तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डालेगी. अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर उन्हें इस संकट से राहत दिलाएगा.

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