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Toggleसीधी: अध्यक्ष की ‘शाही सवारी’ पर सवाल, वाहन-डीजल भुगतान की शिकायत
नगर परिषद रामपुर नैकिन में सरकारी वाहनों, निजी वाहन के उपयोग और डीजल भुगतान को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. शिकायतकर्ता अर्पित पाण्डेय ने नगर परिषद अध्यक्ष रामकुमार साहू पर पद के कथित दुरुपयोग और निकाय की राशि के अनुचित इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए संभागीय और शासन स्तर के अधिकारियों से शिकायत की है. शिकायत के साथ वाहन, भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है.
शिकायत में लगाए गए आरोपों की अभी प्रशासनिक जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. ऐसे में पूरे मामले में दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा.
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अध्यक्ष के इस्तेमाल में वाहन होने का आरोप
शिकायत के मुताबिक वर्ष 2023 में नगर परिषद द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी यानी सीएमओ के शासकीय भ्रमण के लिए MP04ZJ9560 नंबर का वाहन किराये पर लिया गया था. आरोप है कि इस वाहन का इस्तेमाल नगर परिषद अध्यक्ष रामकुमार साहू द्वारा किया जा रहा है और वाहन पर अध्यक्ष की पट्टिका भी लगाई गई है.
शिकायतकर्ता का दावा है कि वाहन को अध्यक्ष के नाम पर किसी आधिकारिक आवंटन के बिना उनके निजी और राजनीतिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए वाहन की लॉगबुक, स्वीकृति आदेश और वास्तविक उपयोग का रिकॉर्ड जांच का विषय है.
बिना टेंडर वाहन अनुबंध का आरोप
शिकायत में दूसरा बड़ा सवाल निजी वाहन को नगर परिषद से जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर उठाया गया है. आरोप है कि खुली निविदा प्रक्रिया के बजाय संक्षिप्त कोटेशन के आधार पर वाहन को नगर परिषद से जोड़ा गया.
शिकायतकर्ता के अनुसार इस वाहन का कमर्शियल या टैक्सी परमिट भी नहीं है, इसके बावजूद नगर परिषद निधि से करीब 29 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है.
अगर यह आरोप दस्तावेजी जांच में सही पाए जाते हैं तो वाहन अनुबंध की प्रक्रिया, स्वीकृति, भुगतान और वाहन के वैध दस्तावेजों की जांच प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगी.
सरकारी कर्मचारी को निजी ड्राइवर बनाने का आरोप
मामले में नगर परिषद के मस्टर श्रमिक चालक किशोर यादव को लेकर भी शिकायत की गई है. आरोप है कि नगर परिषद में कार्यरत कर्मचारी को अध्यक्ष के निजी वाहन चालक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कर्मचारी की उपस्थिति ऑनलाइन आधार आधारित प्रणाली के माध्यम से नगर परिषद में दर्ज होती है. ऐसे में जांच का एक अहम बिंदु यह होगा कि कर्मचारी की वास्तविक ड्यूटी क्या निर्धारित थी और वह किस अधिकारी या जनप्रतिनिधि के निर्देश पर वाहन चला रहा था.
कचरा वाहनों के डीजल भुगतान पर भी सवाल
शिकायत में नगर परिषद के कचरा वाहनों, ट्रैक्टरों और फायर ब्रिगेड के डीजल खर्च को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई वाहनों के मीटर खराब बताए जाने के बाद लॉगबुक में मनमाने तरीके से किलोमीटर दर्ज किए गए और उसी आधार पर डीजल के बिलों का भुगतान कराया गया. इसके अलावा कंधवार फिलिंग स्टेशन से अध्यक्ष के निजी वाहनों में भी नगर परिषद के खर्च पर ईंधन भरवाने का आरोप लगाया गया है.
यदि इन आरोपों की जांच होती है तो लॉगबुक, डीजल पर्चियां, भुगतान वाउचर, वाहन मीटर की स्थिति और पेट्रोल पंप के रिकॉर्ड का मिलान पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है.
फास्टैग और टोल रिकॉर्ड से हो सकता है सत्यापन
शिकायत में वाहन MP04ZJ9560 के पिछले दो महीनों के कथित इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है. शिकायतकर्ता का दावा है कि वाहन कई बार रीवा और जबलपुर गया, जिसकी पुष्टि फास्टैग हिस्ट्री और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड से की जा सकती है.
इसके अलावा 11 सितंबर को सीधी प्रवास पर आए प्रभारी मंत्री से मुलाकात के दौरान अध्यक्ष के इसी वाहन से सर्किट हाउस पहुंचने का दावा भी शिकायत में किया गया है.
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए वाहन की जीपीएस या फास्टैग हिस्ट्री, टोल रिकॉर्ड, लॉगबुक और उस दिन के आधिकारिक कार्यक्रमों का मिलान किया जा सकता है.
धारा 41-क के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि अध्यक्ष के अधिकारों और कर्तव्यों से जुड़े प्रावधानों का कथित उल्लंघन हुआ है और वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है.
इसी आधार पर अध्यक्ष रामकुमार साहू को धारा 41-क के तहत पद से पृथक करने की मांग भी की गई है.
हालांकि, किसी निर्वाचित पदाधिकारी को पद से हटाने का अंतिम निर्णय संबंधित वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच एवं उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही लिया जा सकता है.
शिकायत पहुंची संभाग से मंत्रालय तक
शिकायत की प्रतियां अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग भोपाल, आयुक्त नगरीय प्रशासन, कमिश्नर रीवा और कलेक्टर सीधी सहित संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने की बात कही गई है.
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच कब शुरू होती है और दस्तावेजों की जांच के बाद क्या निष्कर्ष सामने आता है.
नगर परिषद के सरकारी वाहनों की लॉगबुक से लेकर डीजल भुगतान, वाहन अनुबंध, कर्मचारी की ड्यूटी और फास्टैग रिकॉर्ड तक—अगर इन सभी दस्तावेजों का स्वतंत्र रूप से मिलान किया जाता है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि नगर परिषद की राशि का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं.
प्रशासन के सामने कई सवाल
क्या निजी वाहन को नगर परिषद में जोड़ने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई? क्या वाहन के पास आवश्यक व्यावसायिक परमिट था? हर महीने किए जा रहे भुगतान का आधार क्या था? नगर परिषद के कर्मचारियों की वास्तविक ड्यूटी किसके आदेश पर तय की गई? और डीजल की खपत तथा वाहनों की लॉगबुक में दर्ज आंकड़े वास्तविक हैं या नहीं?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन से ही सामने आएंगे.
फिलहाल मामला आरोप और शिकायत के स्तर पर है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना जरूरी है. नगर परिषद अध्यक्ष रामकुमार साहू या नगर परिषद की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक होगा.
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