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Toggleमऊगंज: दलित महिला ने जमीन कब्जाने और मारपीट के आरोप लगाए
मऊगंज: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के लौर खुर्द गांव से एक संवेदनशील मामला सामने आया है. अनुसूचित जाति (कुम्हार) समुदाय की एक महिला ने गांव के कुछ लोगों पर सरकारी पट्टे की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश, मारपीट, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता का कहना है कि शिकायत के बावजूद स्थानीय स्तर पर उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है.
फिलहाल मामला शिकायत के आधार पर सामने आया है. आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों द्वारा की जानी बाकी है.
सरकारी पट्टे की जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायतकर्ता चंद्रवती प्रजापति का आरोप है कि 11 जुलाई 2026 की सुबह गांव के कुछ लोग उनकी जमीन पर हनुमान जी की मूर्ति लेकर पहुंचे और उसे स्थापित करने लगे.
महिला का कहना है कि जब उन्होंने और उनकी सास ने इसका विरोध किया, तो कथित रूप से उनके साथ मारपीट की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई.
पीड़िता का यह भी आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर जमीन में जिंदा गाड़ देने जैसी धमकियां दी गईं, जिससे उनका परिवार भय के माहौल में जी रहा है.
दिव्यांग बेटे को लेकर भी जताई चिंता
शिकायत में महिला ने कहा है कि घटना के दौरान उनके 10 वर्षीय दिव्यांग बेटे को लेकर भी डर पैदा करने वाली बातें कही गईं.
पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद वे लगातार असुरक्षा महसूस कर रहे हैं. उनका आरोप है कि पूरे परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.
एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप
चंद्रवती प्रजापति का कहना है कि घटना के बाद वह थाना लौर पहुंचीं और पुलिस से शिकायत की. उनका आरोप है कि उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई और मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया.
इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक मऊगंज और पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय रीवा को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की.
महिला का यह भी आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय से लौटते समय भी कुछ लोगों ने रास्ता रोककर उन्हें धमकी दी.
सरकारी आवंटित भूमि को लेकर भी विवाद
पीड़िता ने अपने आवेदन में दावा किया है कि वर्ष 2002-03 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा उनके ससुर के नाम कई खसरा नंबरों की भूमि का विधिवत आवंटन किया गया था. इसके लिए ऋण पुस्तिका भी जारी की गई थी.
महिला का आरोप है कि कुछ लोग अब उसी भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों में कथित अनियमितताओं की जांच भी चल रही है.
हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
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परिवार ने सुरक्षा की मांग की
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार भय के साए में जीवन गुजार रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें अपनी जान, परिवार और जमीन की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है.
परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आरोप सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
यह मामला जमीन विवाद, कथित मारपीट और अनुसूचित जाति समुदाय की महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है. ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होती है.
फिलहाल संबंधित पक्षों के आरोप सामने आए हैं. प्रशासन या पुलिस की ओर से मामले में अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है.
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. वहीं यदि जांच में अलग तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी.
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले के सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है. लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है, ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके और किसी भी प्रकार का सामाजिक तनाव न बढ़े.
अब यह देखना होगा कि पुलिस और राजस्व विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है.
निष्कर्ष
मऊगंज के लौर खुर्द गांव से सामने आया यह मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है. फिलहाल शिकायतकर्ता महिला ने जमीन पर कब्जे की कोशिश, मारपीट, जातिसूचक अपमान और धमकी देने के आरोप लगाए हैं. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. अब पूरे मामले की सच्चाई प्रशासनिक और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
रिपोर्ट: दीपक सिंह गहरवर
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