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ToggleMauganj News: कर्नाटक में फंसे मऊगंज के 14 युवक, सुरक्षित वापस लौटे
Mauganj News: रोजगार की तलाश में मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से कर्नाटक गए 14 युवकों के साथ कथित ठगी और प्रताड़ना का मामला सामने आया है. आरोप है कि युवकों को बेहतर मजदूरी, मुफ्त रहने और भोजन का लालच देकर दूसरे राज्य ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिलीं. युवकों का दावा है कि कथित ठेकेदार ने उनसे करीब ₹50,000 लेकर धोखाधड़ी की और बाद में उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया. सूचना मिलने के बाद समाजसेवी विपिन त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना और कर्नाटक पुलिस के सहयोग से सभी 14 युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. अब सभी युवक अपने घर मऊगंज लौट रहे हैं.
रोजगार का वादा, लेकिन हालात निकले अलग
पीड़ित युवकों के अनुसार, उन्हें कर्नाटक में प्रतिदिन ₹1,000 मजदूरी, मुफ्त भोजन और रहने की सुविधा का आश्वासन दिया गया था. इसी भरोसे पर वे अपने घर छोड़कर काम के लिए रवाना हुए.
हालांकि, फैक्ट्री पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह अलग मिले. युवकों का आरोप है कि उन्हें तय मजदूरी नहीं दी गई और प्रतिदिन केवल ₹400 दिए जाने लगे. उनका कहना है कि इसी राशि से उन्हें भोजन और रहने का खर्च भी स्वयं उठाना पड़ रहा था.
बंधक बनाने और मारपीट के आरोप
युवकों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कम मजदूरी और अन्य समस्याओं का विरोध किया, तो उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके साथ मारपीट की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है. मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा सकती है.
एक फोन कॉल से बदली पूरी स्थिति
बताया जा रहा है कि 27 जुलाई को किसी तरह एक युवक लालू मिश्रा को फोन करने का अवसर मिला. उसने समाजसेवी विपिन त्रिपाठी से संपर्क कर पूरी घटना की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई.
सूचना मिलते ही विपिन त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना को इसकी जानकारी दी.
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पूर्व विधायक और कर्नाटक पुलिस ने की मदद
मामले की जानकारी मिलने के बाद पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने कर्नाटक पुलिस और स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया. लगातार समन्वय और प्रयासों के बाद पुलिस ने सभी 14 युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला.
इसके बाद युवकों को सुरक्षा के साथ रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया गया. जानकारी के अनुसार, उन्हें यात्रा के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई, ताकि वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें.
सुरक्षित लौट रहे हैं सभी युवक
राहत की बात यह है कि सभी 14 युवक अब सुरक्षित मऊगंज लौट रहे हैं. घटना के बाद उनके परिजनों ने भी राहत की सांस ली है.
यह मामला एक बार फिर दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है.
रोजगार के नाम पर ठगी रोकने की जरूरत
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं. ऐसे में कई बार कथित एजेंट या दलाल बेहतर नौकरी और अधिक मजदूरी का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य में काम पर जाने से पहले कंपनी, ठेकेदार और रोजगार एजेंसी की पूरी जानकारी और सत्यापन करना जरूरी है. साथ ही स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग के माध्यम से पंजीकृत एजेंसियों की मदद लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है.
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल सभी युवक सुरक्षित लौट रहे हैं, लेकिन मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर है. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
यह घटना दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाने वाले श्रमिकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करना आवश्यक है.
रिपोर्ट: दीपक सिंह गहरवर
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