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Anuppur: चार साल से अधूरी पटना-करपा सड़क, 80 गांव परेशान

Anuppur: चार साल से अधूरी पटना-करपा सड़क, 80 गांव परेशान

Anuppur: चार साल से अधूरी पटना-करपा सड़क, 80 गांव परेशान

Anuppur: अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में निर्माणाधीन पटना-करपा-सरई-केलमनिया सड़क अब विकास की अधूरी तस्वीर बन चुकी है. करीब 53 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कार्य पिछले चार वर्षों से जारी है, लेकिन आज भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी है. इसका सबसे बड़ा असर उन लगभग 80 गांवों पर पड़ रहा है, जिनका संपर्क हर बारिश में मुख्य मार्ग से कट जाता है.

क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार और अस्थायी व्यवस्थाओं के कारण हर साल उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर बच्चों की पढ़ाई और किसानों की आजीविका तक, हर क्षेत्र प्रभावित हो रहा है. कई बार आंदोलन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है.

चार साल बाद भी अधूरी है 53 किलोमीटर सड़क

पटना, करपा, सरई और केलमनिया को जोड़ने वाली यह सड़क क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है. इसका उद्देश्य दूरस्थ गांवों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना था, ताकि लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक आसान पहुंच मिल सके.

लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने के चार वर्ष बाद भी सड़क पूरी नहीं हो पाई है. इस दौरान दो विधानसभा और दो लोकसभा चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं. चुनावी सभाओं में सड़क जल्द तैयार करने के कई वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका.

हर बारिश में बह जाते हैं डायवर्सन

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान कई पुलों पर स्थायी वैकल्पिक मार्ग बनाने के बजाय केवल ह्यूम पाइप डालकर उनके ऊपर मिट्टी भर दी गई. बारिश का पानी बढ़ते ही ये अस्थायी डायवर्सन बह जाते हैं.

डायवर्सन टूटने के बाद कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह समाप्त हो जाता है. लोगों को लंबा चक्कर लगाकर सफर करना पड़ता है या कई दिनों तक गांवों में ही रुकना पड़ता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या हर वर्ष दोहराई जाती है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया.

80 गांवों की आवाजाही होती है प्रभावित

सड़क अधूरी होने का असर केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं है. क्षेत्र के लगभग 80 गांव सीधे इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं.

बारिश के दौरान मरीजों को अस्पताल पहुंचाना कठिन हो जाता है. कई बार गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि वे सुरक्षित तरीके से स्कूल नहीं पहुंच पाते.

इसके अलावा किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क और टूटे डायवर्सन के कारण उनका दैनिक जीवन लगातार प्रभावित हो रहा है.

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मुआवजे का इंतजार कर रहे किसान

निर्माण कार्य के दौरान कई किसानों की निजी जमीन पर अस्थायी डायवर्सन बनाए गए थे. किसानों का आरोप है कि चार वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है.

किसानों का कहना है कि उनकी जमीन लंबे समय से निर्माण कार्य में उपयोग हो रही है, जिसके कारण वे खेती भी नहीं कर पा रहे हैं. इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

अब कुछ किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना मुआवजा दिए वे अपनी जमीन दोबारा उपयोग के लिए नहीं देंगे. इससे सड़क निर्माण कार्य और अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

सात आंदोलन, लेकिन समाधान नहीं

ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण में हो रही देरी को लेकर अब तक सात बार आंदोलन किए जा चुके हैं. कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंपे गए.

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आई. यही कारण है कि अब लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

चुनावी वादों पर उठ रहे सवाल

यह सड़क पिछले दो विधानसभा और दो लोकसभा चुनावों में प्रमुख चुनावी मुद्दा रही. विभिन्न राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों ने मंचों से सड़क जल्द पूरी कराने का वादा किया था.

ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव खत्म होने के बाद निर्माण की गति फिर धीमी पड़ गई. अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का काम कब पूरा होगा.

ग्रामीणों की मांग क्या है

स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए. साथ ही जिन स्थानों पर पुल निर्माण चल रहा है, वहां मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जाएं ताकि बारिश के दौरान आवागमन बाधित न हो.

किसानों ने लंबित मुआवजा जल्द जारी करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि उचित मुआवजा मिलने के बाद ही निर्माण कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगा.

Anuppur: चार साल से अधूरी पटना-करपा सड़क, 80 गांव परेशान
Anuppur: चार साल से अधूरी पटना-करपा सड़क, 80 गांव परेशान

विकास के दावों के बीच बड़ा सवाल

पटना-करपा-सरई-केलमनिया सड़क परियोजना आज विकास की अधूरी कहानी बन गई है. एक ओर बेहतर सड़क सुविधा के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के हजारों लोग हर वर्ष बारिश में आवागमन की गंभीर समस्या झेल रहे हैं.

अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर टिकी है. क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित इस परियोजना को जल्द पूरा किया जाएगा, ताकि 80 गांवों को बार-बार होने वाली इस परेशानी से राहत मिल सके.

रिपोर्ट: सुनील गुप्ता

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