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सतना: निलंबित इंजीनियर का दावा — जनपद से भोपाल तक कमीशन सिस्टम

सतना: निलंबित इंजीनियर का दावा — जनपद से भोपाल तक कमीशन सिस्टम

सतना: निलंबित इंजीनियर का दावा — जनपद से भोपाल तक कमीशन सिस्टम

सतना: सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत में बंदूक लहराने के आरोप में निलंबित सब-इंजीनियर सतीश समेले ने पंचायत राज विभाग में कथित कमीशन सिस्टम का खुलासा किया है. हाईकोर्ट में सबूत पेश करने का दावा.

बंदूक लेकर फील्ड विजिट, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत में पदस्थ रहे संविदा उपयंत्री (सब-इंजीनियर) सतीश समेले हाल ही में एक वीडियो के चलते सुर्खियों में आए थे. वीडियो में वे फील्ड विजिट के दौरान बंदूक और निजी व्यक्तियों के साथ नजर आए थे. इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी.

स्थानीय सरपंचों और सचिवों ने आरोप लगाया था कि समेले फील्ड विजिट के दौरान डर का माहौल बनाते थे और स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार करते थे.

जिला पंचायत सीईओ ने किया सस्पेंड

मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने इसे शासकीय आचरण नियमों और शस्त्र अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए सतीश समेले को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. साथ ही कलेक्टर को पत्र लिखकर यह भी पूछा गया था कि उन्हें शस्त्र लाइसेंस किस उद्देश्य से जारी किया गया था.

समेले का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन यंत्री कार्यालय में अटैच किया गया है.

निलंबन के बाद निलंबित अफसर का चौंकाने वाला दावा

निलंबन की कार्रवाई के बाद सतीश समेले मीडिया के सामने आए और उन्होंने पंचायत राज विभाग में चलने वाले एक कथित “कमीशन सिस्टम” का खुलासा किया. उनका दावा है कि किसी भी निर्माण कार्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग पदों पर बैठे लोगों तक कमीशन के रूप में पहुंचता है.

समेले के अनुसार, कथित कमीशन का बंटवारा इस प्रकार है:

  • सरपंच — 10 प्रतिशत
  • सचिव — 5 प्रतिशत
  • ग्राम रोजगार सहायक — 3 प्रतिशत
  • जनपद सीईओ — 2 से 3 प्रतिशत
  • सहायक यंत्री (AE) — 2 प्रतिशत

समेले के दावे के मुताबिक, इस तरह किसी भी निर्माण कार्य के बजट का करीब 27 से 28 प्रतिशत हिस्सा ग्राउंड लेवल पर ही खर्च हो जाता है.

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“मुझसे भी कराई गई वसूली” — निलंबित अफसर का आरोप

सतीश समेले ने यह भी दावा किया कि यह कथित कमीशन सिस्टम केवल जनपद स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पहुंच भोपाल स्थित मंत्रालय तक बताई जाती है. मीडिया से बातचीत में समेले ने कहा:

“मैं भी इस सिस्टम का हिस्सा रहा हूं, मुझसे भी वसूली कराई गई. अब मैं इसके सबूत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश करूंगा.”

निलंबित अफसर ने संकेत दिया कि वे इस मामले में हाईकोर्ट का रुख करेंगे और अपने पास मौजूद दस्तावेज व सबूत अदालत के समक्ष रखेंगे.

प्रशासन की अब तक क्या रही है प्रतिक्रिया

फिलहाल प्रशासन की ओर से बंदूक लहराने के वीडियो के मामले में सतीश समेले के खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई की जा चुकी है. हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए कमीशन सिस्टम के आरोपों पर प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यह स्पष्ट नहीं है कि इन आरोपों की अलग से कोई जांच शुरू की जाएगी या नहीं.

क्यों अहम है यह मामला

यह प्रकरण दो अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े मुद्दों को उजागर करता है. एक ओर एक सरकारी अधिकारी द्वारा फील्ड ड्यूटी के दौरान हथियार ले जाने और उससे जुड़े शासकीय नियमों के उल्लंघन का मामला है, तो दूसरी ओर ग्रामीण विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप हैं.

यह ध्यान रखना जरूरी है कि सतीश समेले द्वारा लगाए गए कमीशन सिस्टम से जुड़े आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं, और यह एक निलंबित अधिकारी का दावा भर है। यदि यह मामला हाईकोर्ट पहुंचता है, तो आने वाले दिनों में इस पर स्पष्टता सामने आ सकती है.

फिलहाल स्थानीय प्रशासन और पंचायत राज विभाग की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि समेले अदालत में क्या सबूत पेश करते हैं, और क्या इसके आधार पर आगे कोई जांच शुरू होती है.

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