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न दो वक़्त की रोटी है, न घर बनवाने के लिए पैसा, अगर कुछ है तो पुलिस सिक्योरिटी

मध्यप्रदेश की सीधी विधानसभा सीट पिछले कई महीने से चर्चा में बनी हुई है. फ़िलहाल इस सीट पर राजनीति गरमाई हुई है लेकिन कुछ महीने पहले यानी जुलाई 2023 को यहां से एक वीडियो वायरल हुआ जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई. ये वीडियो था आदिवासी पेशाब कांड का. इस वीडियो ने शासन और प्रशासन दोनों को हिला कर रखा दिया. आदिवासी दशमत रावत पर ज़िले के ब्राम्हण प्रवेश शुक्ला ने नशे में धुत होकर पेशाब कर दिया. 

वीडियो वायरल होने के बाद प्रवेश शुक्ला के ऊपर केस दर्ज हुआ, जिसमें पता चला कि प्रवेश शुक्ला सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला का कार्यकर्ता था. ये बात सामने आते ही राजनीतिक सरगर्मी इतनी तेज हो गई  कि प्रदेश के मुखिय़ा सीएम शिवराज सिंह को दशमत रावत के पैर तक धोने पड़े. सरकार ने इस मामले पर गंभीरता इसलिए भी दिखाई क्योंकि मध्यप्रदेश की 230 सीटों में से 47 आदिवासी बाहुल्य सीटें हैं. सीधी सीट भी आदिवासी बाहुल्य मानी जाती है इसलिए ये वीडियो बीजेपी की दूसरी सीटें भी प्रभावित कर सकता था. 

मामला शांत करने के लिए शिवराज सिंह ने कोई कसर नहीं छोड़ी. प्रवेश शुक्ला पर तुरंत केस दर्ज हुआ और दशमत को भोपाल सीएम हाउस बुलाकर न सिर्फ़ सीएम ने उनका सम्मान किया बल्कि 6 लाख रुपये, पुलिस सिक्योरिटी और नौकरी का वादा भी किया. हालांकि सीएम की नौकरी का वादा आज भी अधूरा है और अब प्रशासन ने इस मामले को पूरी तरह से भुला दिया है.

महीनों गुजर गए लेकिन दशमत अब किस हाल में है ये जानने की कोशिश किसी ने नहीं की. विंध्य फ़र्स्ट की टीम दशमत के घर उनका हाल जानने के लिए पहुंची तो एक आलीशान पक्के मकान का ढांचा नज़र आया. पूछने पर पता चला कि दशमत रावत ने सीएम द्वारा दिए गए पैसे से मकान का ढांचा तैयार करवाया है. दीवारें खड़ी हैं, छत पड़ गई है लेकिन छपाई नहीं हुई है. दशमत की पत्नी का कहना है कि आगे का काम करवाने के लिए पैसे ही नहीं है. दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से नसीब हो रही है ऐसे में घर के काम के बारे में कैसे सोच सकते हैं. 

दशमत का परिवार पुलिस सिक्योरिटी और मीडिया के कैमरे से पूरी तरह से परेशान हो चुका है. दशमत ने तो बात करने से भी मना कर दिया, उनकी पत्नी ने कैमरा बंद होने पर अपनी परेशानिया टीम को बताई. दशमत की पत्नी चाहती है कि उनकी ज़िंदगी फिर वैसी ही हो जाए जैसी इस कांड के पहले थी. किसी तरह मज़दूरी कर वो अपना घर चला लेंगी लेकिन पुलिस की सुरक्षा उनके गले का फांस बन चुकी है. 

दशमत की पत्नी इन तमाम परेशानियों के बाद भी प्रवेश शुक्ला को दोषी नहीं मानती हैं. उनका कहना है कि गांव के ब्राम्हण हैं और हमारे लिए पूज्य हैं, जेल भी चले गए लेकिन हमारे परिवार को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाया.

किस हाल में है दशमत रावत और उनके परिवार को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ये जानने के लिए पूरा वीडियो ज़रूर देखें