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Toggleरीवा: कलेक्टर की सख्ती के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन
रीवा: नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की कार्यशैली को लेकर अब कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. जिले में प्रशासनिक सख्ती बढ़ने के बाद अब कर्मचारी संगठन विरोध के मूड में दिखाई दे रहे हैं. बुधवार को जिले भर के कर्मचारी और अधिकारी एकजुट होकर संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर सहित जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है. विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी भी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं.
कमिश्नर कार्यालय में दिखा विरोध का बड़ा प्रदर्शन
रीवा में उस समय अलग ही नजारा देखने को मिला जब विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी एक साथ संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे. बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की.
कर्मचारियों का कहना था कि नए कलेक्टर के आने के बाद लगातार दबाव बढ़ा है. उन्हें समय पर कार्यालय पहुंचने, लंबित फाइलों को जल्द निपटाने और हर कार्य की जवाबदेही तय किए जाने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि अधिकारियों द्वारा लगातार सख्त रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे काम का माहौल तनावपूर्ण बन गया है. कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है.
कलेक्टर की सख्त कार्यशैली बनी चर्चा का विषय
रीवा में पदभार संभालने के बाद से कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी लगातार प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं. उन्होंने शुरुआत से ही साफ संकेत दिए थे कि सरकारी दफ्तरों में लापरवाही और सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
कलेक्टर के निर्देश के बाद कई विभागों में पुराने और लंबित मामलों की समीक्षा शुरू हुई. कर्मचारियों को समय पर दफ्तर पहुंचने और जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए.
सूत्रों के अनुसार, कई विभागों में वर्षों से लंबित छोटे-बड़े कामों को तेजी से पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है. यही वजह है कि लंबे समय से सुस्त कार्यशैली के आदी कर्मचारियों में अब असंतोष बढ़ने लगा है.
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कर्मचारियों का आरोप — बनाया जा रहा अनावश्यक दबाव
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रशासनिक सुधार के नाम पर कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जा रहा है. उनका आरोप है कि छोटी-छोटी बातों पर फटकार लगाई जाती है और लगातार निगरानी रखी जा रही है.
कई कर्मचारियों ने कहा कि अचानक बढ़े काम के दबाव के कारण तनाव की स्थिति बन रही है. कर्मचारियों के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार भी कठोर होता जा रहा है.
हालांकि आम जनता का एक बड़ा वर्ग कलेक्टर की इस सख्ती को सकारात्मक कदम मान रहा है. लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में वर्षों से लंबित कामों को पूरा करने के लिए सख्ती जरूरी है.
कलेक्टर का जवाब — जनता के काम समय पर होना जरूरी
विवाद बढ़ने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि जो काम महीनों और वर्षों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे, वे अब तक लंबित पड़े हैं. ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जनहित से जुड़े कार्य समय पर पूरे कराए जाएं.
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी कर्मचारी को कोई समस्या है तो वह अपनी बात रख सकता है, लेकिन जनता के कामों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन जनता का सेवक है और सरकारी कर्मचारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी लोगों की समस्याओं का समाधान करना है.
कमिश्नर ने कर्मचारियों को दिया आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए संभागायुक्त ने कर्मचारियों की बात सुनी और उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया. कमिश्नर ने कहा कि कर्मचारियों की शिकायतों की जांच की जाएगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
इसके बाद कर्मचारियों ने फिलहाल अपना विरोध शांत किया, लेकिन साफ संकेत दिए कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है.
प्रशासनिक सुधार बनाम कर्मचारियों की नाराजगी
रीवा में यह मामला अब प्रशासनिक सख्ती और कर्मचारियों की नाराजगी के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है. एक ओर प्रशासन व्यवस्था सुधारने और कामकाज को तेज करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठन इसे दबाव और प्रताड़ना बता रहे हैं.
आम लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में वर्षों से चली आ रही सुस्त व्यवस्था को बदलने के लिए जवाबदेही और अनुशासन जरूरी है. वहीं कर्मचारी संगठनों का मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं और कार्य परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है.
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है विवाद
फिलहाल रीवा में प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बनी यह तनातनी चर्चा का विषय बनी हुई है. यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है.
अब देखना होगा कि प्रशासनिक सुधार की यह मुहिम कर्मचारियों के सहयोग से आगे बढ़ती है या फिर विरोध और हड़ताल की स्थिति जिले के कामकाज को प्रभावित करती है. पूरे मामले पर जिलेभर की नजरें टिकी हुई हैं.
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