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रीवा: शौर्य चक्र विजेता संजय तिवारी का रीवा में भव्य स्वागत

न गोलियां शरीर में धंसीं, लेकिन हौसला नहीं टूटा... लश्कर के आतंकी को मार गिराने वाले रीवा के वीर संजय तिवारी को मिला देश का प्रतिष्ठित शौर्य चक्र। पूरे विंध्य को अपने सपूत पर गर्व है

रीवा: शौर्य चक्र विजेता संजय तिवारी का रीवा में भव्य स्वागत

 मध्य प्रदेश के रीवा जिले के लिए बुधवार का दिन गर्व और सम्मान का प्रतीक बन गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों शौर्य चक्र से सम्मानित होने के बाद सीआरपीएफ के वीर जवान संजय तिवारी अपने गृह जिले पहुंचे तो उनका स्वागत किसी विजेता से कम नहीं हुआ. रेलवे स्टेशन से लेकर गांव तक हर जगह देशभक्ति का माहौल दिखाई दिया. ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं की वर्षा और भारत माता की जय के नारों के बीच विंध्य के इस सपूत का नागरिकों ने गर्मजोशी से अभिनंदन किया.

सिरमौर तहसील के डेलही गांव निवासी संजय तिवारी ने अपने साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति से न केवल रीवा बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है. आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए एक अभियान में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और एक खूंखार आतंकी को मार गिराया. इसी अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कारों में शामिल शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है.

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देश पहले, जान बाद में

रीवा पहुंचने के बाद संजय तिवारी ने मीडिया और नागरिकों से बातचीत करते हुए कहा कि उनके लिए देश सर्वोपरि है. उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उन्हें तीन गोलियां लगी थीं, लेकिन उस समय उनके मन में केवल एक ही विचार था कि आतंकी किसी भी कीमत पर बचकर नहीं निकलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जब देश की सुरक्षा का सवाल हो तो व्यक्तिगत दर्द और खतरे पीछे छूट जाते हैं. उनका कर्तव्य था कि आतंकवादियों को उनके मंसूबों में सफल न होने दिया जाए और उन्होंने वही किया.

संजय तिवारी की यह सोच और समर्पण देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है. उनका साहस यह संदेश देता है कि सच्चा सैनिक अपने कर्तव्य के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार रहता है.

आतंकवाद विरोधी अभियान में दिखाई असाधारण वीरता

जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की मौजूदगी की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई थी. सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र की घेराबंदी कर संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया.

ऑपरेशन के दौरान जैसे ही सुरक्षा बल आतंकियों के करीब पहुंचे, आतंकियों ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, पहाड़ी क्षेत्र, सीमित दृश्यता और लगातार हो रही गोलीबारी के बीच अभियान को सफल बनाना आसान नहीं था.

इसी दौरान संजय तिवारी अग्रिम हमला दल का हिस्सा बनकर सबसे आगे बढ़े. उन्होंने अपने साथियों का नेतृत्व करते हुए आतंकियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी और जवाबी कार्रवाई जारी रखी.

मुठभेड़ के दौरान उनके बांह, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में तीन गोलियां लगीं. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया. दर्द और रक्तस्राव की परवाह किए बिना उन्होंने अपनी पोजीशन बनाए रखी और आतंकियों पर जवाबी हमला जारी रखा.

उनकी बहादुरी और रणनीतिक कार्रवाई के परिणामस्वरूप लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकी ढेर हो गया और सुरक्षा बलों का अभियान सफल रहा.

शौर्य चक्र से सम्मानित हुए संजय तिवारी

देश की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान में असाधारण साहस का प्रदर्शन करने वाले जवानों को भारत सरकार द्वारा वीरता पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं. इन्हीं पुरस्कारों में शौर्य चक्र का विशेष स्थान है.

संजय तिवारी को यह सम्मान उनकी अद्वितीय वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए प्रदान किया गया. राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया.

यह सम्मान केवल एक सैनिक की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी सुरक्षा बलों के जवानों को समर्पित है जो हर दिन देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं.

रीवा स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब

जैसे ही संजय तिवारी के रीवा पहुंचने की सूचना लोगों को मिली, बड़ी संख्या में नागरिक रेलवे स्टेशन पहुंच गए. युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने उनका स्वागत किया.

स्टेशन परिसर देशभक्ति के नारों से गूंज उठा. लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया. कई युवाओं ने उन्हें अपना आदर्श बताते हुए उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं. स्थानीय नागरिकों का कहना था कि संजय तिवारी ने पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है. उनकी बहादुरी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी.

गांव में भी हुआ ऐतिहासिक स्वागत

रेलवे स्टेशन से अपने गांव पहुंचने तक जगह-जगह उनका स्वागत किया गया. ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका सम्मान किया और उन्हें गांव का गौरव बताया.

डेलही गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. लोगों ने मिठाइयां बांटी और वीर जवान के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए. ग्रामीणों का कहना था कि संजय तिवारी की उपलब्धि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है.

सांसद जनार्दन मिश्रा ने की सराहना

इस अवसर पर रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने भी संजय तिवारी की वीरता की सराहना की. उन्होंने कहा कि संजय तिवारी ने अपने साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति से पूरे विंध्य क्षेत्र और मध्यप्रदेश का सम्मान बढ़ाया है.

उन्होंने कहा कि तीन गोलियां लगने के बावजूद आतंकियों का सामना करना और मिशन को सफल बनाना असाधारण साहस का परिचायक है. ऐसे जवानों की वजह से देश सुरक्षित है और नागरिक निश्चिंत होकर अपना जीवन जी पाते हैं.

सांसद ने कहा कि संजय तिवारी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करेगी.

युवाओं के लिए प्रेरणा बने संजय तिवारी

आज के समय में जब युवा अपने करियर और भविष्य को लेकर अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में संजय तिवारी जैसे सैनिकों की कहानी उन्हें नई दिशा देती है.

उनकी वीरता सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और समर्पण बनाए रखना ही सच्ची सफलता की पहचान है. देश के प्रति प्रेम और कर्तव्य के प्रति निष्ठा ही उन्हें लाखों लोगों का आदर्श बनाती है.

उनकी उपलब्धि यह भी साबित करती है कि छोटे गांवों से निकलने वाले युवा भी अपने परिश्रम और साहस के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं.

विंध्य की धरती ने फिर बढ़ाया देश का मान

रीवा और विंध्य क्षेत्र की धरती वीर सपूतों की जन्मभूमि रही है. यहां के अनेक जवानों ने देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

संजय तिवारी ने अपनी वीरता से इस गौरवशाली परंपरा को और मजबूत किया है. उनका शौर्य चक्र सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है.

निष्कर्ष

शौर्य चक्र विजेता संजय तिवारी की कहानी अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल है. तीन गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं हटाए और आतंकियों के खिलाफ अभियान को सफल बनाया। उनका यह साहसिक कार्य हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है.

रीवा में हुआ उनका भव्य स्वागत इस बात का प्रमाण है कि देश अपने वीर जवानों के बलिदान और साहस का सम्मान करना जानता है. संजय तिवारी जैसे वीर सैनिक न केवल देश की सुरक्षा के प्रहरी हैं, बल्कि राष्ट्र की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा के प्रकाश स्तंभ भी हैं.

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