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प्रतीक यादव का निधन: राजनीति से दूर रहकर बनाई थी अलग पहचान

यादव परिवार में शोक की लहर… अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन, राजनीति से दूर रहकर फिटनेस और रियल एस्टेट में बनाई थी अपनी अलग पहचान. लखनऊ में हुई इस घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है

प्रतीक यादव का निधन: राजनीति से दूर रहकर बनाई थी अलग पहचान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव परिवार हमेशा चर्चा का केंद्र रहा है. लेकिन इसी परिवार का एक ऐसा नाम भी था जिसने राजनीति से दूरी बनाकर अपनी अलग पहचान बनाई—प्रतीक यादव. समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के सौतेले भाई और दिवंगत नेता Mulayam Singh Yadav के पुत्र प्रतीक यादव अब इस दुनिया में नहीं रहे. उनकी अचानक मौत की खबर ने राजनीतिक गलियारों से लेकर कारोबारी जगत तक सभी को स्तब्ध कर दिया है.

लखनऊ में हुई इस घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी. परिवार, समर्थकों और राजनीतिक नेताओं ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है.

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अखिलेश यादव से कैसे थे रिश्ते?

राजनीतिक परिवारों में रिश्तों को लेकर अक्सर अटकलें लगाई जाती हैं, लेकिन प्रतीक यादव और अखिलेश यादव के संबंधों को लेकर परिवार के करीबी हमेशा सकारात्मक बातें कहते रहे. दोनों भाइयों के बीच मुलाकातें होती रहती थीं और निजी स्तर पर उनके संबंध सामान्य और सौहार्दपूर्ण बताए जाते थे.

Akhilesh Yadav ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह बचपन से प्रतीक को जानते थे और उनकी मौत परिवार के लिए बेहद दुखद है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रतीक अपने कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते थे और जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते थे.

अखिलेश यादव के बयान से यह भी संकेत मिला कि प्रतीक यादव हाल के दिनों में कारोबारी दबाव और आर्थिक नुकसान से परेशान हो सकते थे. हालांकि परिवार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

राजनीति से दूरी, कारोबार से पहचान

जहां यादव परिवार के अधिकांश सदस्य सक्रिय राजनीति में रहे, वहीं प्रतीक यादव ने राजनीति की बजाय बिजनेस की दुनिया को चुना. उन्होंने खुद को एक फिटनेस प्रेमी और सफल कारोबारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश की.

प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित University of Leeds से पढ़ाई की थी. विदेश से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर फिटनेस और रियल एस्टेट सेक्टर में काम शुरू किया.

उनकी लाइफस्टाइल हमेशा चर्चा में रहती थी. सोशल मीडिया पर उनकी फिटनेस तस्वीरें, महंगी कारें और लग्जरी बाइक्स अक्सर वायरल होती थीं. खास तौर पर उनकी लैंबोर्गिनी कार को लेकर वह सुर्खियों में आए थे.

फिटनेस इंडस्ट्री में बनाई अलग पहचान

साल 2015 में प्रतीक यादव ने लखनऊ में “आयरन कोर फिट” नाम से जिम चेन की शुरुआत की थी. फिटनेस के प्रति उनका जुनून ही इस बिजनेस की नींव बना.

उस समय उत्तर प्रदेश में फिटनेस इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही थी और प्रतीक यादव ने इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा. उनका उद्देश्य केवल जिम खोलना नहीं बल्कि युवाओं को हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर प्रेरित करना था.

उनके जिम में आधुनिक मशीनें, प्रोफेशनल ट्रेनर्स और हाई-प्रोफाइल फिटनेस सुविधाएं उपलब्ध थीं. फिटनेस प्रेमियों के बीच उनकी अच्छी पहचान बन गई थी.

रियल एस्टेट कारोबार में भी सक्रिय थे

फिटनेस बिजनेस के अलावा प्रतीक यादव रियल एस्टेट सेक्टर में भी सक्रिय थे. लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में उनके कई कारोबारी निवेश बताए जाते हैं.

हालांकि पिछले कुछ समय से उनके कारोबार को लेकर आर्थिक दबाव की चर्चाएं भी सामने आई थीं. अखिलेश यादव के बयान में “फाइनेंशियल नुकसान” का जिक्र इस ओर संकेत करता है कि बिजनेस से जुड़ी चुनौतियां उन्हें प्रभावित कर रही थीं.

रियल एस्टेट सेक्टर में उतार-चढ़ाव, निवेश संबंधी दबाव और आर्थिक जोखिम अक्सर कारोबारियों पर मानसिक असर डालते हैं. यही कारण है कि प्रतीक यादव के जीवन के इस पहलू पर भी चर्चा हो रही है.

अपर्णा यादव से प्रेम और विवाह

 

प्रतीक यादव की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही. उनकी पत्नी Aparna Yadav भारतीय जनता पार्टी की नेता हैं और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं.

दोनों की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी. दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदली और साल 2011 में दोनों ने विवाह कर लिया. इस शादी में मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी खास चर्चा का विषय रही थी.

राजनीतिक विचारधाराओं में अंतर होने के बावजूद दोनों ने लंबे समय तक अपने रिश्ते को संभालकर रखा.

सोशल मीडिया पोस्ट से उठी थी तलाक की चर्चा

इस साल की शुरुआत में प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसके बाद उनके वैवाहिक संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं.

उन्होंने अपने पोस्ट में कठिन दौर से गुजरने की बात कही थी. इसके बाद मीडिया और सोशल मीडिया पर तलाक की अटकलें लगाई जाने लगीं. हालांकि बाद में परिवार के करीबियों ने दावा किया कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था.

कुछ समय बाद प्रतीक यादव ने “ऑल इज़ वेल” लिखकर पोस्ट किया, जिससे यह संकेत मिला कि दोनों के रिश्तों में सुधार हो गया है.

करोड़ों की संपत्ति के मालिक थे प्रतीक यादव

2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान Aparna Yadav द्वारा दाखिल चुनावी हलफनामे में उनकी और प्रतीक यादव की कुल चल-अचल संपत्ति लगभग 23 करोड़ रुपये बताई गई थी.

इसमें रियल एस्टेट निवेश, लग्जरी वाहन और अन्य संपत्तियां शामिल थीं. प्रतीक यादव की जीवनशैली भी उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाती थी.

परिवार और राजनीति पर पड़ेगा असर

प्रतीक यादव भले ही राजनीति में सक्रिय नहीं थे, लेकिन यादव परिवार का हिस्सा होने के कारण उनका नाम हमेशा सार्वजनिक चर्चा में रहता था. उनकी मौत का असर परिवार के निजी और राजनीतिक दोनों पक्षों पर दिखाई दे सकता है.

समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है. वहीं भाजपा नेताओं ने भी संवेदनाएं प्रकट की हैं.

अचानक मौत ने खड़े किए कई सवाल

प्रतीक यादव की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या कारोबारी तनाव इसकी वजह था? क्या स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या थी? या फिर इसके पीछे कोई और कारण है? इन सभी सवालों के जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे.

फिलहाल परिवार गहरे सदमे में है और राजनीतिक जगत भी इस खबर से स्तब्ध नजर आ रहा है.

निष्कर्ष

प्रतीक यादव ने राजनीति की चमक-दमक से दूर रहकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की. फिटनेस, रियल एस्टेट और लग्जरी लाइफस्टाइल के कारण वह हमेशा चर्चा में रहे. हालांकि उनकी जिंदगी में उतार-चढ़ाव भी कम नहीं रहे.

उनकी अचानक मौत ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सार्वजनिक जीवन में दिखने वाली सफलता के पीछे कई निजी संघर्ष भी छिपे हो सकते हैं. यादव परिवार के लिए यह एक भावनात्मक और कठिन समय है.