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Media Scan:24 अक्टूबर की मुख्य खबरों में है विधायकों की संपत्ति, विंध्य क्षेत्र में स्वच्छता और स्वास्थ्य की बदहाली

 

सोमवार को तीन विधायकों सहित कुछ अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है. इसमें से दो पूर्व विधायक और एक ने पहली बार विधानसभा चुनाव के लिए पर्चा भरा है. साथ ही में इसके साथ अभ्यर्थियों ने अपनी संपत्तियों का ब्योरा भी दिया है. विधायकों की संपत्ति की बात करें तो रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल के 2018 के नामांकन पत्र में दिए गए संपत्ति के ब्याेरे और 2023 के नामांकन पत्र के साथ दिए गए ब्याेरे के मुताबिक 2018 में 32 करोड़ 60 लाख 5022 रुपए उनकी संपत्ति थी जो 5 साल बाद 2023 में 30 करोड़ 88 लाख हो गई है. सेमरिया विधायक के पी त्रिपाठी की संपत्ति 2018 में 9 करोड़ 53 लाख रुपए थी और 2023 में बढ़कर 10 करोड़ 50 लाख हो गई है. सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह की बात करें तो 2018 के चुनाव में उनकी संपत्ति 62 करोड़ 28 लाख 37571 रुपए थी और 2023 में बढ़कर 74 करोड़ 64 लाख 87238 हो गई. अभय मिश्रा की बात करें तो 2018 के चुनाव के समय उनकी संपत्ति 29 करोड़ 39 लाख थी जो अब बढ़कर 34 करोड़ 67 लाख 87 हजार रुपए हो गई है.वहीं इन सबकी पत्नियों की संपत्ति और कर्ज में बढ़ोतरी हुई है.

स्वास्थ्य केंद्राें में सुविधा से मरीज वंचित हैं. मामला गोरगांव का है, जहां रायपुर कर्चुलियान में अव्यवस्था फैली हुई है. यहां मरीजों को बेड और चादर तक नहीं दी जाती है. चादर मांगने पर उन्हें कहा जाता है कि वह स्वयं चादर लेकर आएं. यहां दो दर्जन से ज्यादा मरीज प्रसव के लिए भर्ती हैं लेकिन किसी भी मरीज के बेड में विभाग का एक भी चद्दर नहीं पाया गया. यहां लोग अपने घरों से खाना लाकर खाते हैं. इनको शासन की कोई भी सुविधा नहीं मिल रही है.

गढ़ में अवैध क्लीनिक संचालित होने से मरीजों की स्थिति खराब हो रही है और मृत्यु दर में वृद्धि देखी जा रही है. लोगों को झोलाछाप डॉक्टर को दिखाना पड़ता है क्योंकि उनके पास कोई और रास्ता नहीं है. यह उनसे मनमानी पैसे वसूलते हैं साथ ही उन्हें बाहर के लिए रेफर भी कर देते हैं.

अगली खबर है स्वच्छता को लेकर, जहां पनवार में स्वच्छता के नाम पर शौचालय का निर्माण कागज तक सीमित रह गया है.बाहर से पुताई करवा दी गई है, ना अंदर पानी की व्यवस्था है, ना ही सीट की व्यवस्था है. शौचालय के नाम पर सचिव और सरपंच पैसा जरूर गटक गए हैं लेकिन काम कुछ भी नहीं हुआ.

नई गढ़़ी और चाकघाट दो जगह का मामला है जहां बिजली के तार लटकते रहते हैं और इससे लगातार दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है. चाकघाट के वार्ड 13 में आवासी बस्ती के ऊपर 11000 की लाइन का विद्युत तार गुजर रहा है और यह तार लगातार घरों की छत के ऊपर से गया हुआ है.इस वजह से दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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