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रीवा: विंध्य को मिली बड़ी सौगात, संजय गांधी अस्पताल मे खुला गैस्ट्रोलॉजी विभाग

रीवा को मिली बड़ी स्वास्थ्य सौगात — अब पेट और लीवर की गंभीर बीमारियों का इलाज संजय गांधी अस्पताल में ही संभव

रीवा: विंध्य को मिली बड़ी सौगात, संजय गांधी अस्पताल मे खुला गैस्ट्रोलॉजी विभाग

रीवा और विंध्य क्षेत्र के लाखों मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. लंबे इंतजार के बाद अब संजय गांधी अस्पताल रीवा में अत्याधुनिक गैस्ट्रोलॉजी विभाग की शुरुआत होने जा रही है. इसके शुरू होने के बाद पेट, लीवर, आंत और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए नागपुर, बनारस या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा.

यह विभाग विंध्य क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि अब सुपर स्पेशलिटी इलाज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा. विभाग का शुभारंभ रविवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला करेंगे. इस अवसर पर सांसद जनार्दन मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा, डीन डॉ. सुनील अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहेंगे.

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6.47 करोड़ की लागत से तैयार हुआ विभाग

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आकार देने में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. एनसीएल ने 6.47 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिससे विभाग के लिए अत्याधुनिक मशीनें खरीदी गईं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया.

मशीनों की उपलब्धता के साथ अब वे सभी बाधाएं दूर हो गई हैं, जिनकी वजह से वर्षों से विभाग शुरू नहीं हो पा रहा था. अस्पताल की तीसरी मंजिल पर इसका निर्माण पूरा हो चुका है और विभाग पूरी तरह संचालन के लिए तैयार है.

2018 में मिली थी स्वीकृति, अब जाकर सपना हुआ पूरा

गैस्ट्रोलॉजी विभाग की स्थापना का प्रस्ताव वर्ष 2018 में स्वीकृत हुआ था. तत्कालीन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज इंदूलकर ने इसका प्रस्ताव कार्यकारिणी बैठक में रखा था.

हालांकि प्रशासनिक और संसाधन संबंधी कारणों से यह योजना वर्षों तक फाइलों में अटकी रही. अब एनसीएल की सहायता और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की पहल से यह सपना साकार हो सका है.

किन बीमारियों का होगा इलाज?

गैस्ट्रोलॉजी विभाग शुरू होने से अब पाचन तंत्र और लीवर से जुड़ी कई जटिल बीमारियों का इलाज रीवा में ही संभव होगा. इनमें शामिल हैं-

प्रमुख बीमारियां:

  • लीवर की खराबी और सिरोसिस
  • अल्सर के कारण खून की उल्टी
  • पित्त नली की पथरी
  • पीलिया और कॉलेंजाइटिस
  • पैनक्रिएटाइटिस
  • गॉल ब्लैडर संबंधी रोग
  • आहार नली और अमाशय के रोग
  • बड़ी आंत और पैंक्रियाज का कैंसर
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस
  • क्रोहन डिजीज
  • आंतों की टीबी
  • पाचन तंत्र से जुड़े अन्य जटिल रोग

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खराब खानपान, दूषित पानी और अनियमित जीवनशैली के कारण इन बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में यह विभाग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.

अत्याधुनिक मशीनों से लैस हुआ विभाग

नए गैस्ट्रोलॉजी विभाग को आधुनिक तकनीक और उपकरणों से सुसज्जित किया गया है. विभाग में निम्न मशीनें उपलब्ध होंगी.

उपलब्ध उपकरण:

  • इंडोस्कोप
  • कोलोनोस्कोप
  • एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड
  • फाइब्रोस्कैन
  • ईआरसीपी मशीन
  • मैनोमेट्री सिस्टम

इन मशीनों की मदद से अब गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान और एडवांस लेवल उपचार संभव होगा.

ऑपरेशन और ICU की भी सुविधा

यह विभाग केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां इलाज और ऑपरेशन दोनों की सुविधा उपलब्ध होगी.

विभाग में सुविधाएं:

  • 20 जनरल बेड
  • 4 ICU बेड
  • एडवांस प्रोसीजर और इंटरवेंशन सुविधा
  • इमरजेंसी प्रबंधन व्यवस्था

इससे गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सकेगा.

अब रीवा बनेगा सुपर स्पेशलिटी मेडिकल एजुकेशन सेंटर

गैस्ट्रोलॉजी विभाग की शुरुआत के साथ ही संजय गांधी अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि अब यह सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार करने वाला संस्थान भी बनेगा.

अस्पताल प्रशासन ने डीएम (Doctorate of Medicine) गैस्ट्रोलॉजी कोर्स शुरू करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता हेतु आवेदन कर दिया है.

यदि स्वीकृति मिलती है तो-

  • बाहर से पीजी कर चुके डॉक्टर रीवा आकर डीएम करेंगे
  • क्षेत्र में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी
  • मेडिकल शिक्षा का स्तर मजबूत होगा
  • रीवा मेडिकल हब के रूप में उभरेगा

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी संचालन

गैस्ट्रोलॉजी विभाग की कमान अनुभवी विशेषज्ञों को सौंपी गई है.

विभागीय टीम:

  • डॉ. एम.एच. उस्मानी – विभागाध्यक्ष (HOD)
  • डॉ. प्रदीप निगम – सह प्राध्यापक

इन विशेषज्ञों की निगरानी में मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज उपलब्ध कराया जाएगा.

विंध्य क्षेत्र के लिए क्यों है ऐतिहासिक?

रीवा, सीधी, सतना, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को अब तक पेट और लीवर की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था.

इससे-

  • समय की बर्बादी होती थी
  • इलाज महंगा पड़ता था
  • कई मरीज समय पर उपचार नहीं मिलने से गंभीर हो जाते थे

अब गैस्ट्रोलॉजी विभाग शुरू होने से यह पूरी समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी.

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव

गैस्ट्रोलॉजी विभाग की शुरुआत केवल एक नए विभाग का उद्घाटन नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव है.

यह कदम बताता है कि अब रीवा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है और भविष्य में सुपर स्पेशलिटी हेल्थ हब के रूप में स्थापित हो सकता है.

निष्कर्ष

संजय गांधी अस्पताल में गैस्ट्रोलॉजी विभाग की शुरुआत रीवा ही नहीं, पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. इससे लाखों मरीजों को घर के पास अत्याधुनिक इलाज मिलेगा, मेडिकल शिक्षा को नई दिशा मिलेगी और रीवा का नाम प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल होगा.

अब यह कहना गलत नहीं होगा कि रीवा स्वास्थ्य सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर चुका है.

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