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Vindhya First

कौन होगा मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री?

कौन होगा मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए. सत्ता पर फिर से बीजेपी सरकार काबिज हो गई है. शुरू से ही एंटी- इनकंबेंसी की लहर को देखते हुए बीजेपी ने रणनीति के तहत मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया था बल्कि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा गया. कुछ बड़े चेहरों को सामने रखा गया. अब जब चुनाव हो गए और रिजल्ट भी बीजेपी के पक्ष में आया है, सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर है. लंबे समय से मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान इस देश में फिलहाल आगे हैं लेकिन कई अन्य बड़े नाम भी इसमें शामिल हैं. उनकी लाड़ली बहना योजना का 2023 चुनाव की जीत में अहम योगदान रहा लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इसे नकार दिया.

साल 2003 में बीजेपी ने दिग्विजय सिंह की सरकार को परास्त कर एमपी की 173 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया और सत्ता में काबिज हुई.सीएम बनी उमा भारती और फिर उनके इस्तीफे के बाद बाबूलाल गौर और उनके बाद 2005 में मप्र के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान.2003 में सत्ता में आने के बाद से लगातार 2008, 2013 के चुनाव जीतते हुए 2018 तक बीजेपी सरकार में रही… 15 साल बाद उलटफेर हुआ और कांग्रेस सत्ता में आई…लेकिन कमलनाथ के नेतृत्व में बनी सरकार महज 15 महीने ही चल पाई और दलबदल के बाद शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बन गए.इस बार बीजेपी को 2003 जैसी जीत मिली है लेकिन बीजेपी ने इस बार शिवराज के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं.सात सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा.इनमें से गणेश सिंह और फग्गन सिंह कुलस्ते विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके. नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय अपना-अपना चुनाव जीत गए और अब यही तीनों मुख्यमंत्री पद की रेस में आ गए हैं.इनके अलावा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मुख्य मंत्री बन सकते हैं.

एमपी के विधानसभा चुनाव में दो केन्द्रीय मंत्रियों सहित कुल 5 सांसदों ने जीत हासिल की है.अब इन मंत्रियों और सांसदों को अपनी संसद की सदस्यता 14 दिनों के अंदर छोड़नी होगी.अगर वो संसद की सदस्यता नहीं छोड़ते तो 14 दिनों के बाद अपने आप सदस्यता समाप्त हो जाएगी.ऐसे में संभव है कि दो केन्द्रीय मंत्रियों प्रहलाद पटेल, नरेन्द्र सिंह तोमर और सांसद राकेश सिंह, रीति पाठक और राव उदय प्रताप सिंह संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दें क्योंकि, अगले पांच महीनों में लोकसभा के चुनाव होने हैं.