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रीवा: रीवा में बाढ़ पर सियासत तेज, अनुपम तिवारी ने विधायक राजेंद्र शुक्ल पर लगाए गंभीर आरोप

रीवा में बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात पर सियासत तेज. कांग्रेस नेता अनुपम तिवारी ने जलभराव और नुकसान को लेकर विधायक राजेंद्र शुक्ल पर गंभीर सवाल उठाए और प्रभावित लोगों के लिए तत्काल मुआवजे की मांग की

रीवा: रीवा में बाढ़ पर सियासत तेज, अनुपम तिवारी ने विधायक राजेंद्र शुक्ल पर लगाए गंभीर आरोप

रीवा में कुछ घंटों की तेज बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पैदा होने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी अनुपम तिवारी ने शहर में बने जलभराव के लिए रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

अनुपम तिवारी ने आरोप लगाया कि शहर में बिना समुचित योजना के किए गए कंक्रीट निर्माण, सड़कों की ऊंचाई बढ़ने और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बारिश का पानी लोगों के घरों, दुकानों और निचले इलाकों में घुस गया. उन्होंने इसे कथित तौर पर “मानव जनित कृत्रिम बाढ़” बताते हुए प्रभावित लोगों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की है.

हालांकि, ये आरोप अनुपम तिवारी के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं. इनके संबंध में संबंधित जनप्रतिनिधियों या प्रशासन का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है.

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कुछ घंटों की बारिश और बिगड़े हालात

अनुपम तिवारी का कहना है कि रीवा में महज कुछ घंटों की बारिश के बाद कई इलाकों में पानी भर गया. उनके मुताबिक, नालों, सीवर और सड़कों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुसने से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

उन्होंने कहा कि जलभराव के कारण लोगों का घरेलू सामान, अनाज, दवाइयां और अन्य जरूरी वस्तुएं खराब हुईं. कई परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी.

तिवारी ने कहा कि जिन परिवारों ने अपनी मेहनत की कमाई से घर का सामान जुटाया था, उनके सामने अचानक पैदा हुई इस स्थिति ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है.

कंक्रीट निर्माण और जल निकासी पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने शहर में लगातार हो रहे कंक्रीट निर्माण और सड़कों के निर्माण को लेकर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि कई स्थानों पर सड़क की ऊंचाई बढ़ने से आसपास के घर अपेक्षाकृत नीचे हो गए हैं। ऐसे में बारिश का पानी लोगों के घरों की ओर जाने लगा.

उन्होंने दावा किया कि शहर में विकास कार्यों के दौरान जल निकासी की व्यवस्था को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई. उनका कहना है कि यदि प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बाधित होते हैं और उनके स्थान पर पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तो भारी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है.

“जनता को संवेदना और मदद की जरूरत”

अनुपम तिवारी ने कहा कि इस समय रीवा के लोगों को बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बजाय तत्काल राहत और प्रशासनिक मदद की आवश्यकता है.

उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की कि बारिश और जलभराव से प्रभावित परिवारों का सर्वे कराया जाए. नुकसान का वास्तविक आकलन कर प्रभावित लोगों को नियमानुसार आर्थिक सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए.

उनका कहना है कि जिन लोगों का अनाज, घरेलू सामान, दवाइयां, दुकान का सामान या अन्य संपत्ति बारिश के पानी में खराब हुई है, उनके नुकसान का आकलन प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए.

सांसद जनार्दन मिश्रा से भी सवाल

अनुपम तिवारी ने रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा से भी सवाल किया. उन्होंने पूछा कि जिन परिवारों का सामान और आर्थिक संसाधन बारिश के पानी में बर्बाद हुए हैं, उनकी भरपाई कौन करेगा?

उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों की आंखों में आंसू हैं और उन्हें राजनीतिक बयानबाजी से अधिक वास्तविक मदद की आवश्यकता है.

तिवारी ने जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या योजना है.

अतिक्रमण और शहर की प्लानिंग पर भी सवाल

अनुपम तिवारी ने रीवा में अतिक्रमण और शहरी विकास की योजना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर निर्माण और अतिक्रमण के कारण शहर की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हुई है.

उन्होंने मांग की कि प्रशासन शहर के नालों, जल निकासी मार्गों और अतिक्रमण की स्थिति का व्यापक सर्वे कराए। जहां भी जल निकासी के रास्ते बाधित हैं, उन्हें चिन्हित कर स्थायी समाधान किया जाए.

उनका कहना है कि केवल बारिश के बाद पानी निकाल देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. शहर को भविष्य की भारी बारिश और बदलते मौसम के लिहाज से तैयार करने की जरूरत है.

क्या रीवा को चाहिए नई ड्रेनेज प्लानिंग?

रीवा में सामने आई जलभराव की स्थिति ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. बारिश हर साल होती है, लेकिन यदि सामान्य से कुछ अधिक बारिश होते ही शहर के बड़े हिस्से में पानी भरने लगे, तो यह केवल बारिश का मामला नहीं रह जाता.

ऐसे में जरूरी है कि शहर के प्रमुख नालों, सीवर लाइनों, पुल-पुलियों, जल निकासी मार्गों और निचले इलाकों का तकनीकी सर्वे कराया जाए.

इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि नए सड़क और भवन निर्माण के दौरान प्राकृतिक जल प्रवाह को किस तरह प्रभावित किया गया है. भविष्य की शहरी योजना में जल निकासी को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा.

आरोपों की जांच और प्रशासनिक जवाबदेही जरूरी

रीवा में जलभराव को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रभावित नागरिकों की मदद का है.

यदि किसी क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था की कमी, अतिक्रमण, निर्माण कार्य या अन्य मानवीय कारणों से नुकसान बढ़ा है, तो प्रशासन को इसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए. वहीं, यदि नुकसान केवल अत्यधिक बारिश के कारण हुआ है, तब भी प्रभावित परिवारों को उपलब्ध सरकारी राहत प्रावधानों के तहत सहायता मिलनी चाहिए.

मामले में निष्पक्ष सर्वे और तथ्यात्मक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जलभराव के पीछे मुख्य कारण क्या रहे और भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है.

निष्कर्ष

रीवा में बारिश के बाद पैदा हुए जलभराव ने शहर की जल निकासी व्यवस्था, शहरी नियोजन, सड़क निर्माण और अतिक्रमण जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनुपम तिवारी ने इस पूरे मामले को लेकर विधायक राजेंद्र शुक्ल और अन्य जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाते हुए प्रभावित लोगों के नुकसान की भरपाई की मांग की है.

अब सबसे बड़ी जरूरत राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर जमीनी स्थिति का निष्पक्ष आकलन करने की है. प्रशासन यदि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर नुकसान का आंकलन करता है और जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी समीक्षा कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाता है, तो इससे भविष्य में रीवा के लोगों को ऐसी परेशानियों से राहत मिल सकती है.

जनता के लिए सवाल अब यही है—बारिश के बाद हर साल जलभराव की समस्या से कब स्थायी राहत मिलेगी और शहर की जल निकासी व्यवस्था को कब भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा?

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