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Toggleगर्मी: नौतपा का कहर, 43 डिग्री के पार पहुंचा पारा, हीटवेव से बेहाल लोग
मध्यप्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में नौतपा ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. मई के अंतिम सप्ताह में गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. राजधानी भोपाल, ग्वालियर, रीवा, सतना, खजुराहो और कई जिलों में तापमान लगातार 43 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया जा रहा है. तेज धूप, गर्म हवाएं और उमस भरी रातों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है.
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की आशंका जताई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार नौतपा सामान्य से अधिक खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है. यही वजह है कि लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही.
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क्या होता है नौतपा?
भारतीय पंचांग और मौसम विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौ दिनों तक भीषण गर्मी पड़ती है. इस अवधि को “नौतपा” कहा जाता है. माना जाता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है.
इस बार नौतपा की शुरुआत होते ही प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बादल या बारिश नहीं हुई, तो तापमान और अधिक खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है.
43 डिग्री के पार पहुंचा तापमान
प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया. खजुराहो, नौगांव, रीवा और ग्वालियर जैसे शहरों में दोपहर के समय सड़कें सुनसान नजर आईं. लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं.
दिनभर चल रही लू जैसी हवाओं ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, उल्टी, चक्कर और हीट स्ट्रोक के मरीज बढ़ने लगे हैं.
रात में भी नहीं मिल रही राहत
इस बार सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि रात का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है. आमतौर पर शाम के बाद लोगों को थोड़ी राहत मिल जाती थी, लेकिन अब रात में भी गर्म हवाएं चल रही हैं.
कई शहरों में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया है. इससे लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ गई है. एयर कंडीशनर और कूलर लगातार चलने से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है.
सड़कें सूनी, बाजारों में सन्नाटा
भीषण गर्मी का असर अब बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी दिखाई देने लगा है. दोपहर के समय शहरों की मुख्य सड़कें लगभग खाली नजर आती हैं. लोग धूप से बचने के लिए चेहरे ढंककर निकल रहे हैं.
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों में भीड़ कम दिखाई दे रही है. कई जगहों पर राहगीरों के लिए पानी और छांव की व्यवस्था की जा रही है.
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले 7 दिनों तक तेज गर्मी और हीटवेव चलने की संभावना जताई है. विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने और सूखी हवाओं के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है.
कुछ जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. प्रशासन को सतर्क रहने और स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं.
हीटवेव क्यों बन रही है खतरनाक?
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते शहरीकरण के कारण गर्मी का प्रभाव पहले से अधिक खतरनाक हो गया है. पेड़ों की कटाई, कंक्रीट के बढ़ते निर्माण और जल स्रोतों के कम होने से शहरों का तापमान तेजी से बढ़ रहा है.
इसके अलावा वातावरण में नमी कम होने और सूखी हवाओं के कारण शरीर तेजी से डिहाइड्रेट हो रहा है. यही वजह है कि इस बार हीटवेव लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है.
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार निम्न वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है:
- बुजुर्ग
- छोटे बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- मजदूर और खेतों में काम करने वाले लोग
- हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट मरीज
इन लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है.
गर्मी से बचाव के जरूरी उपाय
विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
पर्याप्त पानी पिएं
शरीर में पानी की कमी न होने दें. दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी और ORS लें.
धूप से बचें
दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें. जरूरी होने पर छाता, टोपी और गमछे का इस्तेमाल करें.
हल्का भोजन करें
तेल और मसालेदार भोजन से बचें. मौसमी फल और तरल पदार्थ ज्यादा लें.
बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें
उन्हें ज्यादा देर तक धूप में न रहने दें.
हीट स्ट्रोक के लक्षण पहचानें
यदि किसी को तेज बुखार, चक्कर, उल्टी या बेहोशी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
किसानों की बढ़ी चिंता
नौतपा की भीषण गर्मी का असर खेती और पशुपालन पर भी पड़ने लगा है. खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है. पशुओं के लिए पानी की कमी की आशंका बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन की तैयारी प्रभावित हो सकती है.
बिजली और पानी की बढ़ी मांग
तेज गर्मी के कारण बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है. शहरों में कई जगह लोकल फॉल्ट और ट्रिपिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं.
इसके अलावा पानी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बनने लगी है. प्रशासन टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की तैयारी कर रहा है.
अगले कुछ दिन बेहद अहम
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले 4 से 5 दिन सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो हीटवेव की स्थिति और गंभीर हो सकती है.
प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है.
निष्कर्ष
नौतपा की शुरुआत ने ही यह संकेत दे दिया है कि इस बार गर्मी आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनने वाली है. 43 डिग्री के पार पहुंचता तापमान, गर्म रातें और हीटवेव का खतरा लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहा है. ऐसे समय में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.
सरकार और प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन लोगों को भी खुद की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना होगा. आने वाले कुछ दिन प्रदेश के लिए बेहद कठिन साबित हो सकते हैं.
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